क्या राजनीति में सेवा की भावना खत्म हो गई है? राजद नेता सर्वजीत की चिंता
सारांश
Key Takeaways
- सेवा की भावना का अभाव
- कुर्सी के लिए खींचतान
- युवाओं का भविष्य
- राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी
- जनता की भलाई
रांची, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं बढ़ती जा रही हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता सर्वजीत ने शनिवार को देश की राजनीति की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों में सेवा की भावना का अभाव हो गया है।
सर्वजीत ने कहा, "वर्तमान में राजनीति में सेवा की भावना खत्म होती जा रही है और लोग केवल कुर्सी के लिए परेशान हैं। यदि लोग कुर्सी के लिए परेशान रहेंगे, तो विवादों का जन्म होगा। जबकि जब त्याग और सेवा की भावना से राजनीति की जाएगी, तो विवाद उत्पन्न नहीं होंगे। मैं यह बात केवल कांग्रेस के लिए नहीं कह रहा, बल्कि यह सभी दलों के लिए और सभी राज्यों में लागू होती है। महाराष्ट्र में भी कुछ उठापटक चल रही है।"
उन्होंने आगे कहा, "आज की राजनीति में मौजूद लोग सेवा नहीं करना चाहते। यह स्थिति बनी रहेगी। देश के बड़े नेता जो स्थितियां पैदा कर रहे हैं, वे नुकसानदायक हैं। मुझे ऐसा लगता है कि एक दिन ऐसा आएगा जब युवा सड़कों पर उतरेंगे और देश की नई दिशा तय करेंगे।"
इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी आपसी खींचतान ने प्रदेश की विकास दर को बाधित कर दिया है। शाहदेव ने कहा, "कर्नाटक में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के बीच चल रही स्थिति किसी से छिपी नहीं है। राज्य में जो सत्ता संघर्ष चल रहा है, उससे प्रदेश की विकास दर प्रभावित हुई है। विकास परियोजनाओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। सचिवालय खाली पड़े हैं, विधायक कभी दिल्ली जा रहे हैं, तो कभी कर्नाटक में गुपचुप बैठकें हो रही हैं। इन सबमें जनता की कोई परवाह नहीं है।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस एक राज्य में सत्ता में है, लेकिन उनमें आपसी महत्वाकांक्षा लोगों की जनभावना पर भारी पड़ रही है। कांग्रेस की सच्चाई यह है कि उनके लिए जनता का विकास नहीं, बल्कि उनका स्वयं का विकास महत्वपूर्ण है।"