क्या राम मंदिर की तरह सोमनाथ मंदिर भी हमारी आस्था का प्रतीक है? : कृष्णा हेगड़े
सारांश
Key Takeaways
- सोमनाथ मंदिर का महत्व भारतीय आस्था में गहरा है।
- कृष्णा हेगड़े ने बीएमसी चुनाव में भ्रष्टाचार का विरोध किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आरोपों को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
- महापौर की नियुक्ति में हिंदू मराठी का चयन महत्वपूर्ण है।
- शिवसेना का विकास पर केंद्रित दृष्टिकोण।
मुंबई, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने सोमनाथ मंदिर के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखे गए पत्र की महत्वपूर्णता को उजागर किया।
उन्होंने सोमवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे कई बार विदेशी आक्रांताओं ने मंदिर को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन सोमनाथ मंदिर हमारे लिए सदैव आस्था का प्रतीक बना रहेगा।
कृष्णा हेगड़े ने कहा कि हम मानते हैं कि विदेशी आक्रांताओं की गतिविधियों के बावजूद सोमनाथ मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक बना हुआ है और आगे भी बना रहेगा। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में सोमनाथ मंदिर की महत्ता को स्पष्ट किया है, जिसका हम खुले दिल से स्वागत करते हैं।
उन्होंने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे द्वारा बीएमसी चुनाव के लिए जारी किए गए घोषणापत्र को 'कट एंड पेस्ट' कहा। उन्होंने दावा किया कि इस घोषणापत्र में कोई तथ्य नहीं है। इसमें उल्लेखित तथ्यों का जनता के हितों से कोई लेना-देना नहीं है। अब यह घोषणापत्र महाराष्ट्र की जनता के लिए अर्थहीन साबित हो रहा है। लोग इन दोनों की सरकार को देख चुके हैं और इनकी कार्यशैली से भलीभांति परिचित हैं। इनके शासनकाल में यही समझ नहीं आता था कि गड्डे में सड़क है या सड़क में गड्डा। अस्पतालों में दवाइयों की कमी थी।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की महायुति सरकार ने हमेशा जनता के कल्याण के लिए कार्य किया है और कई योजनाएं शुरू की हैं। महाराष्ट्र की जनता जानती है कि एक ओर लोग राज्य के विकास के लिए काम कर रहे हैं और दूसरी ओर ऐसे लोग हैं जो जनता के हितों को चोट पहुंचा रहे हैं। इसी कारण जनता ने हमें चुना है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीएमसी चुनाव में भी हमारा भगवा झंडा लहराएगा। हम विकास के लिए इसी तरह कार्य करते रहेंगे।
कृष्णा हेगड़े ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि दिल्ली दंगों में शामिल शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि उन पर गंभीर आरोप हैं।
उन्होंने कहा कि इन दोनों पर दिल्ली में दंगे भड़काने का आरोप है। यह दंगे किसी त्रासदी से कम नहीं थे। कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर आरोपों को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।
उन्होंने महापौर के संबंध में भी अपना रुख स्पष्ट किया और कहा कि हमारी तरफ से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि महापौर हिंदू मराठी होगा।