क्या सबरीमला स्वर्ण चोरी मामला सुनियोजित लूट है?

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क्या सबरीमला स्वर्ण चोरी मामला सुनियोजित लूट है?

सारांश

क्या सबरीमला मंदिर में हुई स्वर्ण चोरी एक सुनियोजित लूट है? केरल हाईकोर्ट की टिप्पणियों ने इस मामले में गहराई से संदेह उत्पन्न कर दिया है। जानिए इस मामले की सभी महत्वपूर्ण जानकारी।

Key Takeaways

  • स्वर्ण चोरी मामले में केरल हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणियाँ।
  • योजनाबद्ध तरीके से संपत्तियों की चोरी का संदेह।
  • विशेष जांच दल (एसआईटी) की भूमिका महत्वपूर्ण।
  • आगामी सुनवाई में और जानकारी मिलने की संभावना।
  • मंदिर की सुरक्षा पर गंभीर सवाल।

कोच्चि, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सबरीमला मंदिर में हुए स्वर्ण चोरी के मामले में केरल हाईकोर्ट ने सोमवार को तीखी टिप्पणियाँ करते हुए कहा कि भगवान अयप्पा के गर्भगृह में लगाए गए सोने के प्लेटों को योजनाबद्ध ढंग से हटाया गया प्रतीत होता है, और यह देवस्वम संपत्तियों की सुनियोजित लूट का संकेत दे सकता है।

डिवीजन बेंच ने निरीक्षण से जुड़ी रिपोर्टों को “गंभीर और चिंताजनक” बताते हुए इस पर संदेह जताया कि क्या मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन पर थी, वही इस अपराध के पीछे हो सकते हैं।

सन्निधानम में स्वर्ण चोरी से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सोने से जुड़े कार्यों में बड़े पैमाने पर हेरफेर के संकेत मिलते हैं, जिसमें सोने की परत चढ़े दरवाजों के पैनल भी शामिल हैं।

विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि इससे इस आशंका को बल मिलता है कि मूल सोने की प्लेटों को बदल दिया गया हो सकता है।

बेंच ने यह भी कहा कि यह वैज्ञानिक रूप से निर्धारित करना जरूरी है कि मौजूदा प्लेटें पुरानी हैं या नई। अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को 20 जनवरी को पुनः निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए सन्निधानम में दरवाजों के पैनलों और अन्य स्वर्ण जड़ित संरचनाओं की सटीक माप करने की अनुमति दी।

पुराने दरवाजों की भी जांच की जाएगी। अदालत ने कहा कि प्रत्येक सोने की प्लेट की आयु और गुणवत्ता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने वीएसएससी के उन अधिकारियों के विस्तृत बयान दर्ज करने का भी आदेश दिया, जिन्होंने निरीक्षण किया था, यह कहते हुए कि रिपोर्ट अत्यंत तकनीकी है और इसमें और स्पष्टता की आवश्यकता है।

यदि आवश्यकता पाई गई, तो एसआईटी को अन्य वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेने की भी अनुमति दी गई है। हालांकि, अदालत ने कहा कि अपराध की कार्यप्रणाली पहले ही वैज्ञानिक रूप से स्थापित हो चुकी है, लेकिन जांच प्रभावित न हो, इस कारण उसने इस स्तर पर तकनीकी विवरण सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया।

रिकॉर्ड पर उपलब्ध निष्कर्ष इस बात के संकेत देते हैं कि यह “साधारण चोरी नहीं” है, बल्कि देवस्वम संपत्तियों की व्यवस्थित लूट की ओर इशारा करता है।

बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि जिन पर मंदिर की संपत्तियों की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वे स्वयं इसमें संलिप्त हो सकते हैं।

एसआईटी ने अदालत को बताया कि वर्तमान में 13 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।

चोरी के बाद कथित रूप से पिघलाए गए सोने का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों की पहचान के लिए आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई हाईकोर्ट में 9 फरवरी को होगी।

Point of View

यह कहना जरूरी है कि सबरीमला मंदिर की सुरक्षा और उसके संपत्तियों की रक्षा एक गंभीर मुद्दा है। यह मामला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
NationPress
19/01/2026

Frequently Asked Questions

सबरीमला स्वर्ण चोरी मामला क्या है?
यह मामला सबरीमला मंदिर में सोने की प्लेटों की चोरी से संबंधित है, जिसे केरल हाईकोर्ट ने सुनियोजित लूट का करार दिया है।
केरल हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि सोने के प्लेटों को योजनाबद्ध तरीके से हटाया गया है और इसे देवस्वम संपत्तियों की सुनियोजित लूट माना जा सकता है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
क्या आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं?
हां, वर्तमान में 13 आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं।
क्या जांच में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी?
जी हां, यदि आवश्यकता पाई गई, तो एसआईटी को अन्य वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों की सहायता लेने की अनुमति दी गई है।
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