क्या सरकार देश को अराजकता की ओर ले जा रही है?: हर्षवर्धन सपकाल
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा की जीत पर जश्न, लेकिन विपक्ष के आरोप गंभीर हैं।
- हर्षवर्धन सपकाल ने धांधली को लेकर चिंता जताई।
- महाविकास अघाड़ी का मैत्रीपूर्ण रिश्ता बना रहेगा।
- 350 सीटों की जीत को महान उपलब्धि माना गया।
- निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं।
बुलढाणा,16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव में भाजपा गठबंधन की शानदार जीत के उपरांत देश भर में भाजपा कार्यालयों में जश्न का माहौल है। इसके विपरीत, विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग और सरकार पर धांधली के आरोप लगाए हैं।
बुलढाणा में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में बीएमसी चुनाव और महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के परिणामों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चुनावों में धांधली से संबंधित सभी मुद्दों को उजागर किया जाना चाहिए। यदि चुनाव आयोग और सरकार के स्तर पर कोई समाधान नहीं निकलता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार देश को अराजकता की ओर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का बैंड भाजपा ने बजा दिया है।
महाविकास अघाड़ी और कांग्रेस के भविष्य के बारे में उन्होंने कहा कि हमारा रिश्ता मैत्रीपूर्ण है और यह बरकरार रहेगा। 2029 के चुनावों से पहले यह और मजबूत होगा और उसके बाद सभी निर्णय अंतिम रूप से लिए जाएंगे।
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों को लेकर कांग्रेस की स्थिति पर उन्होंने कहा कि वर्तमान परिप्रेक्ष्य में 350 सीटें जीतना अपने आप में एक महान राजनीतिक उपलब्धि है।
ठाकरे बंधुओं के साथ चुनाव लड़ने के सवाल पर हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि पुणे में कांग्रेस उद्धव ठाकरे (यूबीटी) के साथ थी और अमरावती में भी दोनों दल एक साथ थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवारों ने महाराष्ट्र नगर पालिका चुनावों में पूरी मजबूती से चुनाव लड़ा। लातूर में अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
शिवसेना (यूबीटी) नेता विनायक राउत ने कहा कि आज जो परिणाम आए हैं, उनमें एक भाजपा नेता ने दो दिन पहले ही इन आंकड़ों की जानकारी दे दी थी। अब वही आंकड़े परिणामों में सामने आए हैं। उन्हें यह पहले से कैसे पता था? यह किस प्रकार का जादू है? इसका रहस्य आप भी जानते हैं। इसमें निश्चित रूप से कुछ गड़बड़ी हुई है, खासकर इस चुनाव प्रक्रिया और चुनाव चिह्न की तस्वीर को लेकर। मतदान में लगाई जाने वाली स्याही भी आसान से निकल रही थी।