राष्ट्रपति भवन में 'पर्पल फेस्ट': 8000 से अधिक दिव्यांगजनों ने किया अमृत उद्यान का अनोखा दौरा

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राष्ट्रपति भवन में 'पर्पल फेस्ट': 8000 से अधिक दिव्यांगजनों ने किया अमृत उद्यान का अनोखा दौरा

सारांश

राष्ट्रपति भवन में आयोजित 'पर्पल फेस्ट' में 8,000 से अधिक दिव्यांगजनों ने भाग लिया। इस उत्सव का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रतिभा और आकांक्षाओं का जश्न मनाना था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया और दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य बातें

दिव्यांगजनों की प्रतिभा और उपलब्धियों का जश्न मनाना।
समाज में दिव्यांगजनों के प्रति जागरूकता बढ़ाना।
राष्ट्रपति ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण की आवश्यकता पर बल दिया।
समावेशी समाज की स्थापना के लिए सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता।
भारत का संविधान दिव्यांगजनों के अधिकारों की सुरक्षा करता है।

नई दिल्ली, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं को मनाने के लिए 13 मार्च को राष्ट्रपति भवन में 'पर्पल फेस्ट' का आयोजन किया गया। इस उत्सव में दिनभर में 8,000 से अधिक दिव्यांगजनों ने अमृत उद्यान का दौरा किया, जिसे विशेष रूप से उनके लिए खोला गया था।

दिव्यांगजनों के लिए काम करने वाले विभिन्न संगठनों की ओर से लगाए गए स्टालों पर उन्होंने कई मनोरंजक खेलों और सीखने की गतिविधियों में भी भाग लिया।

रात में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने समारोह में भाग लिया और राष्ट्रपति भवन के खुले रंगमंच पर दिव्यांगजनों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी देश या समाज की पहचान केवल उसके विशेषाधिकार प्राप्त वर्गों की सफलताओं से नहीं, बल्कि हाशिए पर रहने वाले लोगों के प्रति उसकी संवेदनशीलता से होती है। भारतीय इतिहास पर विचार करें तो हम देखेंगे कि संवेदनशीलता, समावेशिता और सद्भाव हमारे संस्कृति और सभ्यता का आधार हैं। भारत का संविधान हमें आदर्श सामाजिक मानक प्रदान करता है। हमारे संविधान की प्रस्तावना सामाजिक न्याय, समानता और व्यक्ति की गरिमा के सिद्धांतों को स्थापित करती है। राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांत दिव्यांगजनों को शिक्षा, कार्य और सार्वजनिक सहायता का अधिकार प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेशी समाज की स्थापना के लिए दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है। यह केवल सरकार की कोशिशों से संभव नहीं है; इसके लिए समाज के हर व्यक्ति और संस्था की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि हम वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के सामूहिक लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, और दिव्यांगजन इस यात्रा में समान भागीदार हैं। समाज के हर सदस्य का यह कर्तव्य है कि उन्हें समान अवसर और सम्मान के साथ प्रगति का मौका मिले।

राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजनों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्हें इस यात्रा में सरकार और समाज का पूरा सहयोग मिलेगा। उनका समर्पण, मेहनत और लगन न केवल उनके लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि अन्य नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित 'पर्पल फेस्ट' का उद्देश्य विभिन्न प्रकार की शारीरिक बाधाओं और उनके जीवन पर प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना और समाज में दिव्यांगजनों के प्रति समझ, स्वीकृति और समावेश को बढ़ावा देना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्पल फेस्ट का उद्देश्य क्या था?
पर्पल फेस्ट का उद्देश्य दिव्यांगजनों की प्रतिभा, उपलब्धियों और आकांक्षाओं का जश्न मनाना और उनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
इस कार्यक्रम में कितने दिव्यांगजन शामिल हुए?
इस कार्यक्रम में 8,000 से अधिक दिव्यांगजनों ने भाग लिया।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर क्या कहा?
राष्ट्रपति ने दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और समाज में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
पर्पल फेस्ट कब और कहां आयोजित किया गया?
पर्पल फेस्ट 13 मार्च को राष्ट्रपति भवन में आयोजित किया गया।
इस फेस्ट का आयोजन किस मंत्रालय द्वारा किया गया?
यह फेस्ट भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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