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क्या ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल में परिवर्तित कर दिया गया है? मुंबई मेयर सस्पेंस के बीच संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर आरोप

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क्या ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल में परिवर्तित कर दिया गया है? मुंबई मेयर सस्पेंस के बीच संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर आरोप

सारांश

शिवसेना के 29 कॉर्पोरेटर्स को ताज होटल में रोककर रखा गया है, जिसे संजय राउत ने एकनाथ शिंदे के खिलाफ गंभीर आरोप के रूप में प्रस्तुत किया। क्या यह राजनीतिक दबाव का एक नया तरीका है? जानें इस सियासी हलचल के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

शिवसेना के कॉर्पोरेटर्स का ताज होटल में रोके जाना विवादित है।
संजय राउत ने इसे नाइंसाफी करार दिया है।
भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है।
राजनीतिक दबाव का उपयोग चुनावी प्रक्रिया में गलत है।
राज्य के लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ठाणे, 18 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र में बीएमसी और अन्य नगर निकाय चुनावों के परिणामों के बाद राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। विशेष रूप से, नवनिर्वाचित शिवसेना के कॉर्पोरेटर्स को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। खबरों के अनुसार, शिवसेना के 29 कॉर्पोरेटर्स को ताज लैंड्स एंड होटल में बुलाया गया है और वहाँ रोक कर रखा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

उनका कहना है कि शिंदे गुट ने ताज होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल में तब्दील कर दिया है, जहाँ नए चुने गए पार्षदों को बंद किया गया है। उन्होंने इसे पूर्णतः नाइंसाफी और अनुचित कार्रवाई बताया। राउत ने कहा कि यह लॉ एंड ऑर्डर का सवाल है। राज्य में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे की सरकार है, लेकिन इसके बावजूद नए चुने गए शिवसेना के पार्षदों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका आरोप है कि शिवसेना को डर है कि उनके पार्षदों को तोड़ा जा सकता है।

राउत ने कहा कि ताज होटल को एक तरह से जेल जैसा बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत आदेश देना चाहिए कि होटल में बंद किए गए पार्षदों को रिहा किया जाए। उनका कहना है कि किसी भी चुनावी या राजनीतिक प्रक्रिया में ऐसे डर और दबाव का उपयोग करना गलत है।

सूत्रों के अनुसार, नए कॉर्पोरेटर्स को होटल में बुलाने का उद्देश्य यह बताया जा रहा है कि किसी भी प्रकार की खरीद-फरोख्त या दबाव के जरिए पार्षदों को अपने गुट में लाने की कोशिश रोकी जा सके। शिंदे गुट यह सुनिश्चित करना चाह रहा है कि नए चुने गए पार्षद उनके पक्ष में रहें।

गौरतलब है कि शुक्रवार को महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने नगर निगम चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की। 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की गई, और बीएमसी चुनावों में भाजपा 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि बहुमत (114) के लिए शिंदे सेना की मदद चाहिए। महायुति की जीत ने ठाकरे परिवार का तीन दशक का वर्चस्व समाप्त कर दिया। वहीं, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी पूरी तरह विफल नहीं हुई। उनके गठबंधन ने 71 सीटें जीतकर मुंबई के मराठी बहुल इलाके में अपना दबदबा बनाए रखा।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो हर पक्ष अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए हर संभव प्रयास करता है। ऐसे में, यह समझना आवश्यक है कि राजनीतिक खेल में कौन सी शक्तियाँ सक्रिय हैं और आम जनता की भलाई को सबसे पहले रखा जाना चाहिए।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ताज होटल में शिवसेना के कॉर्पोरेटर्स क्यों रोके गए हैं?
सूत्रों के मुताबिक, शिंदे गुट यह सुनिश्चित कर रहा है कि नए चुने गए पार्षद उनके पक्ष में रहें।
संजय राउत ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
संजय राउत ने इसे नाइंसाफी और अनुचित कार्रवाई बताया है।
भाजपा-शिवसेना गठबंधन की चुनावी स्थिति क्या है?
भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने 29 में से 25 निकायों में जीत दर्ज की है।
राष्ट्र प्रेस
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