क्या वाराणसी जिला अदालत ज्ञानवापी विवाद में सीलिंग कपड़ा बदलने का फैसला सुनाएगी?

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क्या वाराणसी जिला अदालत ज्ञानवापी विवाद में सीलिंग कपड़ा बदलने का फैसला सुनाएगी?

सारांश

क्या वाराणसी जिला अदालत ज्ञानवापी विवाद में सीलिंग कपड़ा बदलने का निर्णय लेने जा रही है? जानिए इस मामले की गंभीरता और इसके संभावित परिणामों के बारे में।

Key Takeaways

  • ज्ञानवापी विवाद धार्मिक और कानूनी दृष्टिकोण से संवेदनशील है।
  • सीलिंग कपड़ा बदलने का निर्णय विवाद को सुलझाने में मदद कर सकता है।
  • सर्वेक्षण में मिले शिवलिंग का मामला विवाद का मूल है।
  • अदालत के निर्णय का व्यापक प्रभाव हो सकता है।
  • इस मुद्दे पर सामाजिक समझ और संवेदनशीलता की आवश्यकता है।

वाराणसी, २४ अक्टूबर (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी जिला न्यायालय शुक्रवार को ज्ञानवापी स्थल से संबंधित एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय पर विचार कर सकता है, जहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वेक्षण में कथित तौर पर एक शिवलिंग का पता लगाया गया था। इस सुनवाई में यह निर्धारित होने की संभावना है कि विवादित क्षेत्र को ढकने वाले खराब हो चुके सीलिंग कपड़े को बदला जाना चाहिए या नहीं।

ज्ञानवापी परिसर में अदालत के आदेश पर आयोजित सर्वेक्षण के दौरान शिवलिंग मिलने के बाद उस क्षेत्र को सील कर दिया गया था। अदालत ने निर्देश दिया था कि सील किए गए हिस्से में मौजूद मछलियों को वुजूखाने में स्थानांतरित किया जाए। लेकिन अब, सीलिंग कपड़ा पूरी तरह से खराब हो चुका है। ऐसे में, वाराणसी जिला अदालत से उम्मीद है कि वह क्षेत्र की सुरक्षा बनाए रखने और विवादों को टालने के लिए नया कपड़ा लगाकर दोबारा सील करने का निर्णय लेगी।

हिंदू पक्ष के वकील सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "ज्ञानवापी मामला ट्रायल नंबर १८/२२ का है, जिसमें जिला और सिविल कोर्ट के आदेश पर एएसआई सर्वे कराया गया था। सर्वे के दौरान, वुजूखाना नामक जगह के अंदर एक शिवलिंग मिला था। चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील था और जिला स्तर से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक सुनवाई का विषय बन चुका था, इसलिए इलाके को सील कर अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा में रखा गया था।"

उन्होंने आगे कहा, "सीलिंग कपड़ा अब खराब हो गया है। हमने किसी भी आरोप-प्रत्यारोप से बचने के लिए जिला अदालत से इसे बदलने का अनुरोध किया है। उम्मीद है कि अदालत आज इस पर अपना फैसला सुनाएगी कि कपड़ा बदला जाएगा या नहीं।"

ज्ञानवापी विवाद कई वर्षों से चल रहा है। १२ सितंबर २०२२ को वाराणसी जिला न्यायालय ने विवादित परिसर में हिंदू देवी-देवताओं की दैनिक पूजा-अर्चना की अनुमति मांगने वाली पाँच हिंदू महिलाओं की याचिका पर आपत्तियों को खारिज कर दिया था।

आदेश में स्थल की धार्मिक पहचान पर प्रश्न उठाने वाली सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी गई, जिससे प्रभावी रूप से पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, १९९१ के बारे में चर्चा पुनः शुरू हो गई, यह कानून पूजा स्थलों के धार्मिक चरित्र को उसी रूप में बनाए रखने के लिए बनाया गया था, जैसा कि वे १५ अगस्त, १९४७ को अस्तित्व में थे।

यह मामला अगस्त २०२१ में शुरू हुआ, जब पाँच हिंदू महिलाओं ने वाराणसी सिविल कोर्ट में एक याचिका दायर कर ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर कथित रूप से स्थित मूर्तियों की पूजा करने की अनुमति मांगी। याचिका के बाद, एक जांच आयोग ने मस्जिद परिसर का सर्वेक्षण किया, जिसमें हिंदू याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि वुजूखाना के अंदर एक शिवलिंग पाया गया था।

Point of View

जिसमें धार्मिक भावनाएं और कानूनी जटिलताएं दोनों शामिल हैं। अदालत का निर्णय न केवल इस मामले को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे अन्य समान मामलों में भी दिशा तय हो सकती है। हमें इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और समझदारी से विचार करना चाहिए।
NationPress
15/01/2026

Frequently Asked Questions

ज्ञानवापी विवाद क्या है?
ज्ञानवापी विवाद हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच का एक विवादित धार्मिक स्थल है, जिसमें ज्ञानवापी मस्जिद और उसके आसपास के क्षेत्र को लेकर विवाद है।
सीलिंग कपड़ा क्यों बदला जाना चाहिए?
सीलिंग कपड़ा खराब हो चुका है, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा और विवादों से बचने के लिए इसे बदलने की आवश्यकता है।
सर्वेक्षण में क्या पाया गया था?
सर्वेक्षण के दौरान वुजूखाने में एक शिवलिंग मिलने का दावा किया गया था, जो विवाद का मुख्य कारण है।
इस विवाद का कानूनी इतिहास क्या है?
यह विवाद कई वर्षों से चल रहा है और इसमें कई अदालतों में सुनवाई हो चुकी है।
क्या अदालत का निर्णय अंतिम होगा?
अदालत का निर्णय इस मामले में महत्वपूर्ण होगा लेकिन इसे चुनौती दी जा सकती है।
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