आंध्र प्रदेश सरकार का तीसरे बच्चे पर 25 हजार रुपये का प्रोत्साहन: कांग्रेस सांसद ने की आलोचना
सारांश
Key Takeaways
- 25000 रुपये की प्रोत्साहन राशि तीसरे बच्चे के लिए दी जाएगी।
- कांग्रेस सांसद ने इस नीति की आलोचना की।
- भारत में जनसंख्या वृद्धि की आवश्यकता नहीं, बल्कि शिक्षा की जरूरत है।
अमरावती, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की जनसंख्या को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को प्रोत्साहन राशि देने का ऐलान किया। विधानसभा में सीएम ने कहा कि जो माता-पिता तीसरा बच्चा पैदा करेंगे, उन्हें सरकार द्वारा 25000 रुपये की प्रोत्साहन राशि (आर्थिक सहायता) देने पर विचार किया जा रहा है। चंद्रबाबू नायडू के इस बयान पर तमिलनाडु के विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने तीखा जवाब दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक ग्राफ साझा किया है, जिसमें दिखाया गया है कि भारत की आबादी विश्व में सबसे अधिक है।
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा, "एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार ने जो ड्राफ्ट पॉपुलेशन पॉलिसी पेश की है, उसमें तीसरे बच्चे के लिए 25,000 रुपये और बड़े परिवारों के लिए दूसरी प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। इस पर एक गंभीर सवाल उठता है।
जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और ऑटोमेशन तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था को बदल रहे हैं, तब देश को ऐसे नागरिक बनाने की आवश्यकता है जो इस नई अर्थव्यवस्था में टिक सकें। भारत पहले से ही दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और अगले 50 सालों तक यह स्थिति बनी रहेगी। समस्या जनसंख्या की नहीं, बल्कि अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा, कौशल, नौकरियों और अवसरों की कमी है।
मणिक्कम टैगोर ने आगे लिखा, "यह सोच संघ की लंबे समय से प्रचारित कहानी का अनुसरण करती है। जब सार्वजनिक नीति आर्थिक हकीकत के बजाय सोच पर आधारित होती है, तब यह समाज को गलत दिशा में ले जा सकती है। जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में जन्म दर को बढ़ावा दिया जाता है क्योंकि वे जनसंख्या में कमी के चलते संकट का सामना कर रहे हैं। जबकि भारत को पहले अपनी मौजूदा जनसंख्या को शिक्षा और रोजगार देना चाहिए।"
असली सवाल यह नहीं है कि भारत में कितने लोग होंगे, बल्कि यह है कि एआई के युग में हम कितने पढ़े-लिखे, कौशलयुक्त और सक्षम नागरिक बना सकते हैं। सार्वजनिक नीति को भारत के कामकाजी भविष्य के लिए तैयार होना चाहिए, न कि जनसंख्या बढ़ाने को एक राजनीतिक परियोजना मानना चाहिए।