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क्या राजद नेता चंद्रशेखर यादव का आरोप सच है, 'मतदाताओं को वोटर लिस्ट से निकालने की साजिश'?

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क्या राजद नेता चंद्रशेखर यादव का आरोप सच है, 'मतदाताओं को वोटर लिस्ट से निकालने की साजिश'?

सारांश

क्या चुनाव आयोग का वोटर लिस्ट मेगा वेरिफिकेशन अभियान गरीबों और अल्पसंख्यकों को मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश है? राजद नेता चंद्रशेखर यादव का यह आरोप लोकतंत्र पर गंभीर सवाल उठाता है। जानिए इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

वोटर लिस्ट मेगा वेरिफिकेशन अभियान पर विपक्ष का संदेह।
चंद्रशेखर यादव का लोकतंत्र पर हमला बताना।
गरीब मतदाताओं को हटाने की साजिश का आरोप।
बिहार का इतिहास परिवर्तन का रहा है।
धर्मनिरपेक्षता पर संविधान की सुरक्षा की बात।

नई दिल्ली, 29 जून (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग द्वारा आरंभ किए गए वोटर लिस्ट मेगा वेरिफिकेशन अभियान पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और इंडिया ब्लॉक के नेता इसे गरीब, दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाने की साजिश मानते हैं। चंद्रशेखर यादव ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया है।

राजद नेता चंद्रशेखर यादव ने रविवार को समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "इतने बड़े पैमाने पर वेरिफिकेशन को कम समय में पूरा करना संभव नहीं है, जिससे लाखों मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। एक जून तक वेरिफिकेशन पूरा हो गया था, लेकिन अचानक पुनः सत्यापन की आवश्यकता सामने आई। यह दर्शाता है कि उनकी घृणास्पद, सांप्रदायिक रणनीति अब समाज में काम नहीं कर रही है। बिहार हमेशा से परिवर्तन का प्रतीक रहा है और नफरत के खिलाफ खड़ा रहा है।"

उन्होंने आगे कहा कि जब युवा नेता तेजस्वी प्रसाद यादव जैसे नेता मूल मुद्दों जैसे गरीबी, बेरोजगारी और महंगाई पर जनता के बीच पहुंचते हैं, तो उनका समर्थन बढ़ता है। इससे नफरत फैलाने वाले तत्व घबरा जाते हैं और अपनी जमीन खोने का भय महसूस करते हैं।

चंद्रशेखर यादव ने यह आशंका भी जताई कि प्रदेश में एनआरसी की तर्ज पर वेरिफिकेशन किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "इनका एक ही उद्देश्य है कि गरीब मतदाताओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया जाए। हम यह महाराष्ट्र और दिल्ली विधानसभा चुनाव में देख चुके हैं।"

संविधान के प्रस्तावना में 'सेक्युलरिज्म और सोशलिस्ट' शब्दों को हटाने की बहस के संदर्भ में उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार रोजगार, देश के विकास या किसानों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंतित नहीं है। 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया गया था, लेकिन अब 2025 आ गया है और कुछ भी नहीं बदला है। बेरोजगारी और गरीबी जैसे मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक तत्व सक्रिय हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धर्मनिरपेक्षता से इन लोगों को समस्या क्या है? संविधान में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ हमारी पार्टी स्वीकार नहीं करती। समाजवाद से क्या दिक्कत है?"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह आवश्यक है कि हम राजनीतिक आरोपों के पीछे की सच्चाई को समझें। चंद्रशेखर यादव द्वारा उठाए गए सवाल महत्वपूर्ण हैं और इस समय की सच्चाई यह है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता अत्यंत आवश्यक है। हमें लोकतंत्र की रक्षा और सभी मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या वोटर लिस्ट मेगा वेरिफिकेशन अभियान में अनियमितता हो रही है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि यह अभियान गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं को वोटर सूची से हटाने के लिए है, लेकिन इसकी सच्चाई का पता चुनाव आयोग की कार्यवाही से चलेगा।
क्या एनआरसी की तर्ज पर वोटर लिस्ट का सत्यापन किया जा सकता है?
राजद नेता चंद्रशेखर यादव ने इस आशंका को व्यक्त किया है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है कि ऐसा होगा या नहीं।
केंद्र सरकार ने किसानों के लिए क्या वादे किए थे?
केंद्र सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं आया है।
राष्ट्र प्रेस
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