क्या है ललिता सप्तमी: जानें पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त?

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क्या है ललिता सप्तमी: जानें पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त?

सारांश

ललिता सप्तमी का पर्व राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जानें इस पावन दिन की पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त के बारे में।

Key Takeaways

  • ललिता सप्तमी
  • यह व्रत विशेष रूप से नवविवाहित दंपत्तियों के लिए लाभकारी है।
  • पूजा में तुलसी का उपयोग करना शुभ माना जाता है।
  • इस दिन अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना चाहिए।
  • ललिता देवी की पूजा से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ललिता सप्तमी का पर्व मनाया जाता है। यह पावन अवसर राधा रानी की प्रिय सखी ललिता देवी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में रहेगा जबकि चंद्रमा 7 बजकर 53 मिनट तक तुला राशि में रहेगा और बाद में वृश्चिक राशि में गोचर करेगा।

दृक पंचांग के अनुसार, इस दिन अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा जबकि राहुकाल का समय सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

यह व्रत मुख्य रूप से मथुरा, वृंदावन और आसपास के ब्रज क्षेत्र में मनाया जाता है। ललिता देवी राधा और कृष्ण की रासलीला में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं और अष्टसखियों में से एक मानी जाती हैं, जो राधा रानी के हर सुख-दुख में साथ रहती थीं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन ललिता देवी की पूजा करने से राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण दोनों प्रसन्न होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत से भक्तों के जीवन में सुख, समृद्धि, प्रेम और सौभाग्य का आगमन होता है। यह व्रत विशेष रूप से नवविवाहित जोड़ों के लिए लाभदायक माना जाता है। कहते हैं कि जो दंपत्ति श्रद्धापूर्वक ललिता देवी की पूजा करते हैं, उनका वैवाहिक जीवन प्रेम और सुख से भरा रहता है।

कई स्थानों पर इस व्रत को संतान सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, जो संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए किया जाता है।

व्रत रखने के लिए इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर नित्य कर्म स्नान आदि करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। इसके बाद आसन बिछाएं, फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर उसमें राधा-कृष्ण और देवी ललिता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। व्रत का संकल्प लेने के बाद देवी ललिता को लाल रंग के वस्त्र, फूल, श्रृंगार सामग्री और मिठाई अर्पित करें। पूजा में तुलसी दल का उपयोग शुभ माना जाता है।

देवी ललिता की आरती और तीन बार परिक्रमा करने के बाद 'ॐ ह्रीं ललितायै नमः' मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। इसके बाद आरती का आचमन कर आसन को प्रणाम कर प्रसाद ग्रहण करें।

Point of View

जो न केवल भक्ति का प्रतीक है बल्कि सांस्कृतिक धरोहर का भी हिस्सा है। यह पर्व समाज में प्रेम, समर्पण और एकता का संदेश फैलाता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

ललिता सप्तमी कब है?
ललिता सप्तमी भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है।
ललिता देवी की पूजा का महत्व क्या है?
ललिता देवी की पूजा करने से राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में सुख और समृद्धि आती है।
क्या ललिता सप्तमी पर व्रत करना अनिवार्य है?
यह व्रत विशेष रूप से नवविवाहित जोड़ों के लिए फलदायी माना जाता है, लेकिन इसे कोई भी श्रद्धा से कर सकता है।
ललिता सप्तमी की पूजा विधि क्या है?
इस दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें और ललिता देवी की पूजा करें।
संतान सप्तमी का क्या महत्व है?
संतान सप्तमी पर संतान की अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए व्रत किया जाता है।