क्या लालू परिवार के अपराध की सूची और बढ़ेगी? संजय सरावगी
सारांश
Key Takeaways
- लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय हुए हैं।
- संजय सरावगी के अनुसार, अपराधों की सूची लंबी है।
- रेलवे में नौकरी के बदले जमीन लेना गंभीर अपराध है।
- बिहार में एनडीए सरकार के आने के बाद विकास हो रहा है।
- अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
पटना, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ चर्चित लैंड फॉर जॉब मामले में अदालत ने आरोप तय किए हैं। इसके बाद से राजनीतिक हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। बिहार भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि लालू यादव के परिवार की अपराधों की सूची काफी लंबी हो गई है और उन्हें अभी और सजा मिलनी बाकी है।
संजय सरावगी ने पटना एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि लालू यादव और उनके परिवार वाले राजनीति के नाम पर आपराधिक सिंडिकेट चला रहे हैं। इन लोगों को लगातार मामलों में सजा मिल रही है और सुरक्षा एजेंसियों को पता है कि कई अन्य मामलों में भी खुलासे हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि रेलवे जैसी संस्थाओं में नौकरी के बदले जमीन लिखाना एक गंभीर अपराध है। युवाओं के साथ लालू यादव और उनके परिवार ने धोखा किया है। इससे पहले भी लालू यादव को कई मामलों में सजा मिल चुकी है।
संजय सरावगी ने कहा कि लालू यादव के शासन में बिहार के लोगों को सम्मान नहीं मिलता था। जब से एनडीए सरकार ने सत्ता संभाली है, बिहार का विकास लगातार हो रहा है, और आने वाले दिनों में और विकास देखने को मिलेगा।
वही संजय सरावगी ने कहा कि लालू यादव परिवार की सोच में कोई बदलाव नहीं आया है। उनके जेल जाने के बाद ऐसे लोगों को मुख्यमंत्री बनाया गया था जो अपना नाम भी ठीक से नहीं लिख सकते थे। वह दिन बिहारवासियों को याद है, इसलिए बिहार की जनता एनडीए के साथ है।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब मामले में कुल 98 आरोपियों में से 52 को आरोपमुक्त कर दिया है, जबकि शेष आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह भी बताया कि इस मामले में 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, और अब 41 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी।
अदालत ने पूर्व रेल मंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव तथा उनके परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि आरोप यह है कि लालू प्रसाद यादव ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी और बच्चों के नाम पर अचल संपत्तियां जुटाईं। इस मामले में अन्य आरोपियों ने भी आपराधिक षड्यंत्र में सक्रिय रूप से सहयोग किया। अदालत ने टिप्पणी की कि रेलवे में नौकरी के बदले जमीन का एक एक्सचेंज सिस्टम चल रहा था, जिसके तहत कई लोगों को रेलवे में नौकरी दी गई और बदले में उनकी या उनके परिजनों की जमीन ली गई।