एलपीजी मुद्दे पर विपक्ष की राजनीति: बसवराज बोम्मई का बयान
सारांश
Key Takeaways
- विपक्ष की राजनीति के कारण एलपीजी मुद्दा चर्चा में है।
- लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
- भारत ने एलपीजी आपूर्ति के लिए वैकल्पिक उपाय किए हैं।
- बजट का उपयोग विकास के लिए होना चाहिए।
- कांग्रेस का हर अच्छे काम का विरोध करना एक चिंता का विषय है।
बेंगलुरु, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद बसवराज बोम्मई ने कहा कि विपक्ष की ओर से एलपीजी के मुद्दे पर राजनीति की जा रही है, जो कि हताशा का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों के कारण वैश्विक स्तर पर कुछ समस्याएँ उत्पन्न हुई हैं, लेकिन लोगों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। यदि घबराहट न हो, तो एलपीजी की कोई कमी नहीं होगी।
शुक्रवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोम्मई ने कहा कि एलपीजी की समस्या केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी इसका प्रभाव देखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत को एलपीजी की आपूर्ति कतर और अन्य अरब देशों से होती है। इन क्षेत्रों से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत ने चार-पांच अन्य देशों से भी आपूर्ति की व्यवस्था की है।
बोम्मई ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों के चलते देश को कच्चे तेल की एक स्थिर आपूर्ति मिलती रही है। उन्होंने कहा कि कई अन्य देश इस तरह के अवसर प्राप्त नहीं कर पाते हैं और विपक्ष को इस मामले में प्रधानमंत्री को बधाई देनी चाहिए थी।
उन्होंने याद दिलाया कि जब इराक युद्ध के दौरान कांग्रेस की सरकार थी, उस समय एके एंटनी ने पेट्रोल पंपों को रात 8 बजे के बाद बंद रखने का आदेश दिया था, जिसके चलते पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लगती थीं।
भाजपा नेता ने कहा कि आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ऐसी स्थिति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने घरेलू उत्पादन में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और यदि लोग घबराहट में खरीदारी नहीं करेंगे, तो किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी।
कांग्रेस द्वारा इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के सवाल पर बोम्मई ने कहा कि कांग्रेस देश के हित में होने वाले हर अच्छे कार्य का विरोध करती है।
राज्य बजट की आलोचना करते हुए बोम्मई ने कहा कि बजट में क्या लिखा है यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि विकास के लिए धन का उपयोग कैसे किया जाता है यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लगभग 35 प्रतिशत फंड को गारंटी योजनाओं की ओर मोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बजट को विकास-विरोधी बताते हुए मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया और कहा कि यह स्थिति अधिक समय तक नहीं चलेगी और सच्चाई जल्द ही सामने आएगी।