30 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लखनऊ में भारतीय सेना का ‘रणनीतिक संचार सम्मेलन’: सूचना आधारित संघर्षों की चुनौतियों पर विचार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लखनऊ में भारतीय सेना का ‘रणनीतिक संचार सम्मेलन’: सूचना आधारित संघर्षों की चुनौतियों पर विचार

सारांश

लखनऊ में भारतीय सेना का पहला ‘रणनीतिक संचार सम्मेलन’ आयोजित हुआ, जहाँ लगभग 500 विशेषज्ञों ने सूचना आधारित संघर्षों में सुरक्षा के नए आयामों पर विचार-विमर्श किया। जानें कैसे यह सम्मेलन भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

मुख्य बातें

रणनीतिक संचार का महत्व - धारणा और सूचना शक्ति की भूमिका को समझना।
भविष्य की रणनीतियाँ - उभरते सूचना क्षेत्र में नई नीतियों का विकास।
बहु-क्षेत्रीय अभियान - रणनीतिक संचार की आवश्यकताएँ।
विशेषज्ञों का योगदान - विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श।
राष्ट्रीय सुरक्षा - सुरक्षा संरचना में सुधार के लिए सुझाव।

लखनऊ, 7 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य और सूचना आधारित संघर्षों के बढ़ते संकटों के बीच, भारतीय सेना की मध्य कमान ने शनिवार को लखनऊ में अपना पहला ‘रणनीतिक संचार सम्मेलन’ आयोजित किया। यह सम्मेलन लखनऊ छावनी के सूर्य ऑडिटोरियम में हुआ, जिसमें लगभग 500 प्रतिभागियों ने भाग लिया और राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में रणनीतिक संचार की भूमिका पर गहन चर्चा की।

सम्मेलन में सीनियर सैन्य अधिकारी, राजनयिक, सरकारी संचार विशेषज्ञ और रक्षा तथा विदेश नीति के मीडिया विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा के संस्थागत पहलुओं, धारणा प्रबंधन, सूचना शक्ति और बहु-क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञ सत्र और पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।

मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि आधुनिक संघर्षों की प्रकृति में बुनियादी परिवर्तन हो चुका है और अब युद्ध केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। आज सूचना और संज्ञानात्मक क्षेत्र भी युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

उन्होंने धारणा प्रबंधन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धारणा ही वैधता को आकार देती है, वैधता प्रभाव को और प्रभाव अंततः परिणामों को निर्धारित करता है। आज कथानक (नैरेटिव) को भी एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, और इसलिए रणनीतिक संचार को संस्थागत रूप देना आवश्यक है। यह केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि सिद्धांत आधारित और क्षमता संचालित होना चाहिए।

रक्षा और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ, नितिन गोखले ने “उभरते सूचना क्षेत्र में रणनीतिक संचार” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आज के समय में सूचना की शक्ति किसी भी राष्ट्र की रणनीतिक क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है।

सत्र में “उभरते सूचना क्षेत्र में भविष्य की तैयारी के लिए रणनीतिक संचार का संस्थागतकरण” पर भी चर्चा हुई। इस सत्र में पूर्व स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज, पूर्व राजदूत यशवर्धन सिन्हा और लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने अपने विचार साझा किए। इसके बाद आयोजित विशेष संवाद सत्र में बहु-क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार से संबंधित रणनीतियों, संरचनाओं और प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई। इस सत्र में राजदूत दिलीप सिन्हा, डॉ. शांतनु मुखर्जी, वीणा जैन, शरत चंदर और लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे ने अपने अनुभव साझा किए।

मुख्यालय मध्य कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने दिनभर हुई चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया और प्रतिभागियों को धन्यवाद दिया। आयोजकों के अनुसार, इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक संचार को एक संस्थागत क्षमता के रूप में मजबूत करना और उभरते सूचना क्षेत्र में नीतिगत तथा व्यावहारिक स्तर पर नई रणनीतियों, संरचनाओं और प्रक्रियाओं के लिए उपयोगी सुझाव तैयार करना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो उभरते वैश्विक परिवेश में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रणनीतिक संचार सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?
इस सम्मेलन का उद्देश्य भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा संरचना में रणनीतिक संचार को मजबूत करना और नई रणनीतियों का विकास करना है।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से विशेषज्ञ शामिल हुए?
सम्मेलन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, राजनयिक, सरकारी संचार विशेषज्ञ और रक्षा तथा विदेश नीति के मीडिया विशेषज्ञ शामिल हुए।
धारणा प्रबंधन का महत्व क्यों है?
धारणा प्रबंधन वैधता को आकार देता है, जो प्रभाव और परिणाम को निर्धारित करता है।
कौन-कौन से विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में धारणा प्रबंधन, सूचना शक्ति, और बहु-क्षेत्रीय अभियानों में रणनीतिक संचार की भूमिका पर चर्चा की गई।
इस सम्मेलन का आयोजन कब हुआ?
यह सम्मेलन 7 मार्च को लखनऊ में आयोजित हुआ।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले