क्या लखनऊ में नाव की सैर के साथ बटेश्वर की संस्कृति और आस्था का अनुभव किया जा सकता है?
सारांश
Key Takeaways
- नाविकों को स्टोरी टेलिंग का प्रशिक्षण दिया गया है।
- पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध बनाने के लिए आधुनिक सुविधाएँ जोड़ी गई हैं।
- स्थानीय समुदाय के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित हो रहे हैं।
- आपदा प्रबंधन और प्राथमिक उपचार पर प्रशिक्षण दिया गया।
लखनऊ, 7 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आगरा जनपद के यमुना तट पर स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन गांव बटेश्वर में ग्रामीण पर्यटन को एक नई दिशा देने के लिए एक अभिनव प्रयास किया गया है। अब यहाँ पर्यटक केवल नाव की सैर का आनंद ही नहीं लेंगे, बल्कि नौकायन के दौरान लोक कथाएँ, धार्मिक परंपराएँ और ऐतिहासिक प्रसंगों के माध्यम से बटेश्वर की सांस्कृतिक विरासत को भी समझ सकेंगे।
इस पहल के तहत स्थानीय नाविकों को पारंपरिक सेवा प्रदाता से आगे बढ़ाकर स्टोरी टेलर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। कांशीराम पर्यटन प्रबंधन संस्थान (एमकेआईटीएम), लखनऊ के सहयोग से तथा एसडीआरएफ टीम द्वारा 5 से 7 जनवरी तक आयोजित तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बटेश्वर के कुल 32 नाविकों को कुशल व्यवहार, पर्यटकों से संवाद, आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और ऑनलाइन भुगतान जैसी आधुनिक सुविधाओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इसका उद्देश्य पर्यटकों के अनुभव को सुरक्षित, समृद्ध और यादगार बनाना है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि बटेश्वर में ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। नाविकों को स्टोरी टेलिंग, आपदा प्रबंधन और डिजिटल सुविधाओं से जोड़कर उन्हें केवल नाव चलाने तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि बटेश्वर की संस्कृति, इतिहास और आस्था का जीवंत संवाहक बनाया जा रहा है। इससे एक ओर पर्यटकों का अनुभव बेहतर होगा, वहीं स्थानीय समुदाय के लिए स्थायी आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रशिक्षण के दौरान एमकेआईटीएम के स्टोरी टेलर गौरव श्रीवास्तव ने बाह-बटेश्वर की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन विरासत से जुड़े प्रमुख प्रसंगों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावी कहानी कहने की कला किस प्रकार घाटों, नौका विहार और आसपास के पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए अधिक आकर्षक बना सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2024 से अब तक उत्तर प्रदेश पर्यटन द्वारा 2500 से अधिक नाविकों को स्टोरी टेलिंग का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
एसडीआरएफ टीम ने आपात परिस्थितियों में बचाव के व्यावहारिक तरीके सिखाए, जबकि चिकित्सकों ने सीपीआर और त्वरित प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सभी प्रशिक्षित नाविकों को पहचान और एकरूपता के लिए टी-शर्ट और सदरी वितरित की गई।
जयवीर सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन को केवल स्थलों तक सीमित न रखते हुए स्थानीय समुदाय को सहभागी बनाया जा रहा है। निरंतर प्रशिक्षण के माध्यम से नाविकों को कौशल, आत्मविश्वास और पहचान मिल रही है, जिससे समावेशी और जन-सहभागिता आधारित पर्यटन मॉडल को मजबूती मिल रही है।