16 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नवरात्र षष्ठी: मां कात्यायनी से जुड़ा पोई का पौधा, आयुर्वेद में है अद्वितीय औषधीय महत्व

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नवरात्र षष्ठी: मां कात्यायनी से जुड़ा पोई का पौधा, आयुर्वेद में है अद्वितीय औषधीय महत्व

सारांश

नवरात्र के छठे दिन की अधिष्ठात्री देवी मां कात्यायनी से आयुर्वेद में पोई (उपोदिका) का नाता जोड़ा गया है। यह त्रिदोषनाशक पौधा कब्ज, एनीमिया, एसिडिटी और अनिद्रा में राहत देता है — धर्म और प्राचीन चिकित्सा विज्ञान के अनोखे संगम की जीवित मिसाल।

मुख्य बातें

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी से जुड़ा औषधीय पौधा पोई (संस्कृत: उपोदिका ) आयुर्वेद में त्रिदोषनाशक माना जाता है।
मार्कंडेय पुराण के अनुसार देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का संबंध नौ दिव्य औषधियों से है।
पोई में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और फोलेट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
यह पौधा एनीमिया, पुरानी कब्ज, एसिडिटी, तनाव और त्वचा रोगों में लाभकारी बताया जाता है।
आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार इसकी शीतल तासीर पित्त और आंतरिक जलन को शांत करती है।

नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी की आराधना की जाती है — शक्ति, साहस और ओज की इस देवी का संबंध आयुर्वेद में पोई (संस्कृत नाम: उपोदिका) नामक औषधीय पौधे से जोड़ा गया है। मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का संबंध नौ दिव्य औषधियों से है, और इस क्रम में छठे दिन की अधिष्ठात्री देवी से पोई का नाता माना जाता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह पौधा केवल एक साधारण साग नहीं, बल्कि त्रिदोषनाशक, वाजीकारक और बहुगुणी जड़ी-बूटी है।

पोई क्या है और क्यों है खास

आयुर्वेद के अनुसार, पोई का पौधा स्वाद में मधुर, तासीर में शीतल, चिकना और भारी होता है। यह कफ और पित्त का नाश करने वाला, शरीर में बल और वर्ण को बढ़ाने वाला तथा भोजन के प्रति रुचि जाग्रत करने वाला माना जाता है। गौरतलब है कि यह पौधा भारत के कई हिस्सों में सामान्य रूप से उगाया जाता है, परंतु इसके औषधीय गुणों से अधिकांश लोग अपरिचित हैं।

पाचन और पेट के रोगों में लाभकारी

पोई की पत्तियों में प्राकृतिक चिकनाई और भरपूर फाइबर पाया जाता है, जो आंतों की सफाई में सहायक होता है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, इसका नियमित सेवन पुरानी कब्ज, पेट के अल्सर और कमज़ोर पाचन-क्रिया में राहत देता है। इसकी शीतल तासीर शरीर की आंतरिक गर्मी को शांत करती है, जिससे हाथ-पैरों की जलन, पित्त विकार और एसिडिटी में विशेष लाभ मिलता है।

मस्तिष्क और नींद पर प्रभाव

आयुर्वेद के अनुसार, पोई का सेवन मस्तिष्क की नसों को शांत करता है। यह तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं को कम करने में प्रभावी माना जाता है। जिन लोगों को नियमित रूप से नींद न आने की शिकायत रहती है, उनके लिए इसे एक प्राकृतिक विकल्प के रूप में देखा जाता है — हालांकि किसी भी औषधि का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना उचित है।

पोषण और रक्त-शुद्धि में भूमिका

पोई में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और फोलेट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, यह शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को बढ़ाती है और एनीमिया (रक्तहीनता) दूर करने में सहायक है। इसके नियमित सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी मज़बूत होती है।

त्वचा और सौंदर्य पर असर

मां कात्यायनी को ओज और सौंदर्य की प्रतीक माना जाता है, और इसी के अनुरूप पोई का सेवन रक्त शुद्धि कर चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाता है। आयुर्वेद ग्रंथों के अनुसार, यह कील-मुहांसे, दाद-खुजली और अन्य त्वचा संबंधी विकारों को दूर करने में भी सहायक है। नवरात्र का यह छठा दिन धार्मिक आस्था और प्राचीन चिकित्सा ज्ञान के संगम का प्रतीक है — एक ऐसी परंपरा जो प्रकृति को उपचार का माध्यम मानती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन पौधों के सांस्कृतिक संदर्भ को तो उजागर करती है, पर आधुनिक पोषण-विज्ञान से इनकी पुष्टि या खंडन पर चुप्पी साधती है। पोई में आयरन और फोलेट की मौजूदगी पोषण-विशेषज्ञों द्वारा स्वीकृत है, लेकिन 'त्रिदोषनाशक' जैसे दावों को वैज्ञानिक सत्यापन की आवश्यकता है। पाठकों को चाहिए कि वे इसे सांस्कृतिक ज्ञान के रूप में आदर दें और किसी भी औषधीय उपयोग से पहले विशेषज्ञ से परामर्श करें।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पोई का पौधा क्या है और इसे मां कात्यायनी से क्यों जोड़ा जाता है?
पोई (संस्कृत: उपोदिका) एक औषधीय पौधा है जिसे मार्कंडेय पुराण के अनुसार नवरात्र के छठे दिन की देवी मां कात्यायनी से जोड़ा गया है। आयुर्वेद में माना जाता है कि देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से प्रत्येक एक दिव्य औषधि से संबंधित है।
पोई के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुर्वेद के अनुसार, पोई एनीमिया, पुरानी कब्ज, एसिडिटी, तनाव और त्वचा रोगों में लाभकारी है। इसमें आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और फोलेट प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो हीमोग्लोबिन बढ़ाने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता मज़बूत करने में सहायक हैं।
पोई की तासीर कैसी होती है और किसे इसका सेवन करना चाहिए?
पोई की तासीर शीतल होती है, इसलिए यह पित्त विकार, हाथ-पैरों की जलन और एसिडिटी से पीड़ित लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है। हालांकि किसी भी औषधि का सेवन शुरू करने से पहले आयुर्वेदाचार्य या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।
नवरात्र में नौ देवियों से जुड़ी नौ औषधियाँ कौन-सी हैं?
मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में से प्रत्येक एक दिव्य औषधि से जुड़ा है। छठे दिन की अधिष्ठात्री मां कात्यायनी का संबंध पोई (उपोदिका) से है। शेष आठ औषधियाँ अन्य आठ स्वरूपों से क्रमशः संबद्ध हैं, जो आयुर्वेद और धर्म के अद्वितीय संगम को दर्शाती हैं।
पोई का सेवन मस्तिष्क और नींद पर कैसे असर डालता है?
आयुर्वेद के अनुसार, पोई मस्तिष्क की नसों को शांत करती है और तनाव, चिंता तथा अनिद्रा में राहत देती है। अनिद्रा से पीड़ित लोगों के लिए इसे एक प्राकृतिक विकल्प माना जाता है, परंतु गंभीर नींद विकार में चिकित्सीय सलाह अनिवार्य है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. कल
  3. 6 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले