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नवरात्र चतुर्थी: माता कूष्मांडा और पेठे का आयुर्वेदिक संबंध, जानें कूष्मांड के औषधीय गुण

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नवरात्र चतुर्थी: माता कूष्मांडा और पेठे का आयुर्वेदिक संबंध, जानें कूष्मांड के औषधीय गुण

सारांश

नवरात्र के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा होती है और उनके नाम से जुड़ा पेठा (Ash Gourd) आयुर्वेद में 'रसायन' माना गया है। यह फल मस्तिष्क, पाचन, किडनी और रक्तचाप के लिए पारंपरिक रूप से लाभकारी बताया जाता है।

मुख्य बातें

नवरात्र के चौथे दिन माता कूष्मांडा की पूजा होती है, जिनका नाम कूष्मांड (पेठा) से जुड़ा है।
आयुर्वेद में पेठे को रसायन — यानी ऊर्जावर्धक और जीवनशक्ति बनाए रखने वाला द्रव्य — माना गया है।
पेठा शीतल, पित्त-शामक और पाचन-सहायक है; एसिडिटी और अल्सर में राहतदायक बताया जाता है।
पारंपरिक चिकित्सा में यह स्मरण शक्ति, किडनी डिटॉक्स और रक्तचाप नियंत्रण में उपयोगी माना गया है।
गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में केवल घरेलू उपाय नहीं, बल्कि योग्य चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।

नवरात्र के चौथे दिन मां दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप माता कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, माता कूष्मांडा का नाम स्वयं कूष्मांड — यानी पेठे (अंग्रेजी में Ash Gourd) — से जुड़ा हुआ है। यह फल सदियों से भारतीय रसोई और पारंपरिक चिकित्सा पद्धति दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता आया है।

कूष्मांड का आयुर्वेदिक महत्व

आयुर्वेदिक ग्रंथों में कूष्मांड को शीतल, पौष्टिक और पित्त-शामक गुणों वाला माना गया है। इसे 'रसायन' की श्रेणी में रखा गया है — अर्थात ऐसा द्रव्य जो शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करे और उसकी जीवनशक्ति को बनाए रखे। आयुर्वेद के अनुसार इसकी शीतल प्रकृति शरीर की अतिरिक्त गर्मी और जलन को शांत करने में सहायक हो सकती है।

मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए लाभकारी

आधुनिक जीवनशैली में तनाव, चिंता और स्मृति-दुर्बलता की समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में पेठे को मस्तिष्क के लिए अत्यंत उपयोगी बताया गया है। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार यह स्मरण शक्ति को बेहतर बनाने में सहायक है और अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजनरेटिव स्थितियों में भी लाभकारी बताया जाता है। अत्यधिक मानसिक दबाव में रहने वालों के लिए पेठे का रस पारंपरिक रूप से उपयोगी माना जाता है।

पाचन तंत्र और एसिडिटी में राहत

जो लोग एसिडिटी, पेट में जलन या अल्सर जैसी समस्याओं से परेशान रहते हैं, उनके लिए पेठा विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसकी शीतल तासीर अम्लपित्त (एसिडिटी) को शांत करने में प्रभावी बताई जाती है। साथ ही यह पाचन तंत्र की आंतरिक सफाई में भी सहायक माना गया है।

किडनी, हृदय और रक्तचाप पर प्रभाव

पारंपरिक चिकित्सा में कूष्मांड को एक प्राकृतिक डिटॉक्स एजेंट के रूप में देखा जाता है। यह किडनी की सफाई में सहायक बताया जाता है और पथरी जैसी समस्याओं में राहत देने का गुण रखता है। इसके अतिरिक्त, यह रक्तचाप नियंत्रण और रक्त-संबंधी विकारों में भी उपयोगी माना गया है।

सावधानी और चिकित्सकीय परामर्श

आयुर्वेद में पेठे के उपर्युक्त गुणों का उल्लेख मिलता है, किंतु किसी भी गंभीर या दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना आवश्यक है। नवरात्र का यह पर्व जहाँ आध्यात्मिक दृष्टि से माता कूष्मांडा की उपासना का अवसर है, वहीं यह प्रकृति के इस औषधीय उपहार के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे आधुनिक स्वास्थ्य सलाह का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। पेठे के आयुर्वेदिक गुणों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है, परंतु इन दावों की पुष्टि के लिए समकालीन क्लिनिकल शोध सीमित है। मीडिया की जिम्मेदारी है कि वह पाठकों को पारंपरिक ज्ञान और चिकित्सकीय परामर्श के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझाए, ताकि कोई भी गंभीर बीमारी में केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर न हो।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माता कूष्मांडा और पेठे का क्या संबंध है?
आयुर्वेद और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, माता कूष्मांडा का नाम 'कूष्मांड' यानी पेठे (Ash Gourd) से लिया गया है। नवरात्र के चौथे दिन उनकी पूजा के साथ इस फल का धार्मिक और औषधीय महत्व जुड़ा हुआ माना जाता है।
आयुर्वेद में पेठे को 'रसायन' क्यों कहा गया है?
आयुर्वेदिक परंपरा में 'रसायन' उन द्रव्यों को कहते हैं जो शरीर को नई ऊर्जा देते हैं और जीवनशक्ति बनाए रखते हैं। पेठे को शीतल, पौष्टिक और पित्त को शांत करने वाले गुणों के कारण इस श्रेणी में रखा गया है।
पेठा किन स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया जाता है?
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में पेठे को एसिडिटी, पेट में जलन, अल्सर, किडनी की सफाई, पथरी, रक्तचाप नियंत्रण और मानसिक तनाव में उपयोगी माना गया है। स्मरण शक्ति बढ़ाने और अल्जाइमर जैसी स्थितियों में भी इसे लाभकारी बताया जाता है।
क्या पेठे का उपयोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है?
नहीं। किसी भी गंभीर या दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या में केवल पेठे जैसे घरेलू उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। योग्य चिकित्सक से परामर्श और उचित उपचार अनिवार्य है।
नवरात्र 2026 में चतुर्थी कब है और माता कूष्मांडा की पूजा कैसे होती है?
वर्ष 2026 में नवरात्र चतुर्थी 14 अक्टूबर को है। इस दिन माता कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार उन्हें पेठे से जुड़े प्रसाद अर्पित करने का भी महत्व बताया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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