नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इन विशेष मंदिरों का करें दर्शन
सारांश
Key Takeaways
- नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा का महत्व।
- मध्य प्रदेश का लमान माता मंदिर।
- कानपुर और वाराणसी के मां कुष्मांडा के मंदिर।
- मंदिरों में विशेष भोग अर्पित करने का महत्व।
- मां की विशेष कृपा पाने के उपाय।
नई दिल्ली, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में मां के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है और हर दिन की पूजा विधि अलग होती है।
आज हम नवरात्रि के चौथे दिन की आराधना की जाने वाली मां जगदम्बा के स्वरूप मां कुष्मांडा पर चर्चा करेंगे, जिन्हें जगत की आदिशक्ति के रूप में पूजा जाता है। यह माना जाता है कि मां कुष्मांडा की पूजा से यश और बल की वृद्धि होती है। देश भर में मां कुष्मांडा को समर्पित कई मंदिर हैं, जहां भक्त दर्शन कर मां की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
सबसे पहले बात करते हैं मध्य प्रदेश के लमान माता मंदिर की, जो दतिया में स्थित है। इसे प्राचीन शक्तिपीठों में गिना जाता है और इसे 'नौकरी देने वाली देवी' का मंदिर भी कहा जाता है। यदि किसी को नौकरी प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है, तो उसे लमान माता के दर्शन अवश्य करने चाहिए। नवरात्रि के चौथे दिन यहां मां को मालपुए का भोग अर्पित किया जाता है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं।
अब उत्तर प्रदेश की धरती पर स्थित मां कुष्मांडा के दो मंदिरों की चर्चा करें। पहला कानपुर में है जबकि दूसरा वाराणसी में है। कानपुर के मां कुष्मांडा देवी मंदिर की बात करें तो यह एक प्राचीन शक्तिपीठ है, जहां का पवित्र जल नेत्र रोगों से राहत देने में सहायक होता है। नेत्र विकारों से पीड़ित लोग यहां दर्शन के बाद पवित्र जल लेकर जाते हैं। यहां मां की लेटी हुई प्रतिमा स्थापित है, जिससे रहस्यमयी जल निकलता है।
तीसरा और अंतिम मंदिर वाराणसी में तुलसी मानस मंदिर के निकट है। इसे दुर्गाकुंड मंदिर भी कहा जाता है। यहां लक्ष्मी, सरस्वती और काली जैसी देवियों की पूजा होती है, लेकिन नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा के रूप में तीनों देवियों को सजाया जाता है। मंदिर के पास एक बड़ा आयताकार जलकुंड है, जहां हर साल नवरात्रि में भक्त स्नान के लिए आते हैं।