क्या मध्य प्रदेश में पीने के पानी का हर तीसरा गिलास दूषित है?
सारांश
Key Takeaways
- मध्य प्रदेश में हर तीसरा गिलास पानी दूषित है।
- 36.7 प्रतिशत पानी के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए।
- सरकारी अस्पतालों में केवल 12 प्रतिशत पानी पीने योग्य है।
- जल जीवन मिशन के तहत भारी बजट आवंटित किया गया है।
- समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
भोपाल, 10 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के मामले को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य की जलापूर्ति व्यवस्था पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि राज्य में पेयजल के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद पीने के पानी का हर तीसरा गिलास दूषित है।
पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत राज्य सरकार का बजट 19,949 करोड़ रुपए है। पिछले पांच वर्षों में केंद्र सरकार ने भी जल जीवन मिशन के अंतर्गत 26,952 करोड़ रुपए मध्य प्रदेश को आवंटित किए हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार ने स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने और ड्रेनेज लाइन सुधारने के नाम पर बैंकों से 4 से 5 हजार करोड़ रुपए का ऋण लिया। इसके बावजूद स्थिति यह है कि आज प्रदेश में हर तीसरा गिलास पीने का पानी दूषित है।
पटवारी ने आगे कहा कि पूरे मध्य प्रदेश में 36.7 प्रतिशत पानी के सैंपल गुणवत्ता जांच में असफल पाए गए हैं, जिनमें बैक्टीरिया और रासायनिक जहर की उपस्थिति पाई गई है। यह स्थिति किसी तकनीकी लापरवाही का परिणाम नहीं, बल्कि प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
जीतू पटवारी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में केवल 12 प्रतिशत और स्कूलों में मात्र 26.7 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य पाया गया है। यानी जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए और जहां बच्चों का भविष्य बनाना चाहिए, वहीं उन्हें जहर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हजारों करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद यदि जनता को सुरक्षित पेयजल नहीं मिल पा रहा है तो यह पूरी व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है।