क्या विश्व हिंदू प्रवासियों ने पीएम मोदी से बांग्लादेश में हिंसा पर कार्रवाई का आग्रह किया?
सारांश
Key Takeaways
- बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है।
- विश्व हिंदू प्रवासी समूहों ने पीएम मोदी से तात्कालिक कार्रवाई की अपील की है।
- चिट्ठी में मानवाधिकार उल्लंघनों का जिक्र किया गया है।
- बांग्लादेश सरकार पर सांप्रदायिक हिंसा को नकारने का आरोप है।
- प्रवासी हिंदुओं की सुरक्षा के लिए एक मानवाधिकार कॉरिडोर बनाने की मांग की गई है।
वॉशिंगटन, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के प्रति बढ़ती हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऐसे में, हिंदू प्रवासी समूहों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सलाहकारों से बांग्लादेश में हालात पर ध्यान देने की गुहार लगाई है। प्रवासी हिंदुओं ने भारत सरकार से बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा पर तात्कालिक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने हत्याओं, भीड़ के हमलों और सरकार द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होने का जिक्र किया है।
पीएम मोदी को भेजी गई चिट्ठी में, वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने कहा कि वे यह अपील अत्यंत दुख और जल्दबाजी में कर रहे हैं। यह अपील एक युवा बांग्लादेशी हिंदू, दीपू चंद्र दास, की लिंचिंग और जलाने की घटनाओं के बाद की गई है।
चिट्ठी में उल्लेख किया गया, “अगस्त 2025 से, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में तेजी आई है। दिसंबर 2025 के मध्य से फैले आतंक का सिलसिला लगातार जारी है। मनगढ़ंत ईशनिंदा के आरोपों पर लिंचिंग कोई नई बात नहीं है।” उन्होंने पिछले साल 2025 में हुई उत्सव मंडल की हत्या का भी उल्लेख किया।
चिट्ठी में यह भी कहा गया कि बांग्लादेश में हिंदुओं को इतिहास ने बार-बार नजरअंदाज किया है। प्रवासी समूहों ने 1950 के लियाकत-नेहरू पैक्ट का भी उल्लेख किया, जिसमें अल्पसंख्यकों को सुरक्षा का वादा किया गया था, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं हुआ। इसमें 1971 के लिबरेशन वॉर के बाद कई हिंदू रिफ्यूजी को बांग्लादेश वापस भेजने का जिक्र भी किया गया है।
वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने मौजूदा हालात को हिंदुओं का नरसंहार करार दिया है। उन्होंने कहा कि अगस्त 2024 से, मानवाधिकारों के उल्लंघन पर स्थानीय मीडिया की रिपोर्टिंग लगभग नगण्य है। हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाले गलत सूचना अभियान के चलते मीडिया की चुप्पी बढ़ गई है।
चिट्ठी में ईसकॉन के वरिष्ठ संत चिन्मय कृष्ण दास के मामले का भी उल्लेख किया गया है, जिन्हें 25 नवंबर, 2024 से मनगढ़ंत आरोपों के तहत जेल में रखा गया है और बार-बार जमानत देने से मना किया गया है। लोगों ने बांग्लादेश की अंतरिम यूनुस सरकार पर इसे सांप्रदायिक हिंसा मानने से इनकार करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इससे एक खतरनाक संकेत जाता है कि भीड़ बिना किसी सजा के कार्य कर सकती है।
चिट्ठी में आगे कहा गया कि अगस्त 2024 और जून 2025 के बीच अल्पसंख्यकों पर 2,442 से अधिक हमले हुए और इनमें अधिकांश हिंदू थे। इस दौरान दर्जनों अल्पसंख्यक हिंदुओं की हत्याएं भी हुईं। समूह ने बताया कि अकेले अगस्त और नवंबर 2024 के बीच 82 लोग मारे गए। इसके अलावा, बलात्कार, मंदिरों में तोड़फोड़ और भीड़ द्वारा आग लगाने की घटनाएं भी सामने आईं।
चिट्ठी में बांग्लादेश हिंदू, बौद्ध, ईसाई यूनिटी काउंसिल के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। उन्होंने कहा कि हाल के हफ्तों में हालात और खराब हो गए हैं। पिछले 35 दिनों में लिंचिंग, शूटिंग और भीड़ के हमलों में 11 हिंदू मारे गए हैं।
विश्व हिंदू प्रवासियों ने भारत से हमलों की सार्वजनिक निंदा करने की अपील की है। उन्होंने एक मानवीय कॉरिडोर, रिफ्यूजी कैंप और यूएन की निगरानी वाले सुरक्षित जोन बनाने की मांग की है। इसके साथ ही नई दिल्ली से इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने और कट्टरपंथी समूहों पर राजनयिक और आर्थिक दबाव डालने की भी अपील की गई है।
चिट्ठी में कहा गया कि कई बांग्लादेशी हिंदू बिना सुरक्षित कॉरिडोर के भारत नहीं पहुंच सकते। वैश्विक हिंदू प्रवासियों ने अमेरिका में देश भर में मौन विरोध की योजना बनाई है।
यह विरोध प्रदर्शन शनिवार, 31 जनवरी को अमेरिका के बड़े शहरों में होना है। आयोजकों ने कहा कि इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना और यह संदेश देना है कि हिंसा को अनदेखा नहीं किया जा सकता।