क्या ईरान में भी तख्तापलट की तैयारी हो रही है?
सारांश
Key Takeaways
- ईरान में 115 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।
- बांग्लादेश और नेपाल के आंदोलनों की तरह ईरान में भी बदलाव की संभावना है।
- अमेरिका ने ईरान के प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।
- खामेनेई ने बाहरी दबाव के खिलाफ ईरान की ताकत का जिक्र किया।
- तेहरान ने आरोप लगाया है कि बाहरी ताकतें आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पिछले वर्ष 28 दिसंबर से ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन जारी हैं। ये प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होते जा रहे हैं। अब तक 115 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और दो हजार से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि ईरान में तख्तापलट हो सकता है। हाल ही में वेनेजुएला, नेपाल और बांग्लादेश में जिस प्रकार से सरकार में परिवर्तन हुआ है, उससे इन अटकलों को और बल मिला है। इसके साथ ही, अमेरिका की भूमिका पर भी चर्चा होती रही है।
ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों, बढ़ते दमन और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुली असहमति के बीच यह सवाल उठता है कि क्या देश किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर बढ़ रहा है? ईरान के लोग महंगाई, बेरोजगारी, सामाजिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियों और सत्ता के केंद्रीकरण के खिलाफ नाराजगी का सामना कर रहे हैं।
बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार को गिराने से पहले एक राजनीतिक विरोध शुरू हुआ था, जो धीरे-धीरे युवाओं के बीच पहुंचा। युवाओं ने हसीना की सरकार के खिलाफ गहरा असंतोष व्यक्त किया, और यह विरोध प्रदर्शन तेजी से उग्र हो गया। अंततः, हसीना की सरकार को गिराने में यह कारगर साबित हुआ।
नेपाल के जेनजी आंदोलन का भी कुछ ऐसा ही हाल था। नेपाल का जेनजी आंदोलन 2025 का सबसे बड़ा आंदोलन था, जिसमें पहले राजनीतिक विरोध देखने को मिला, जो बाद में जेनजी आंदोलन में बदल गया। यह आंदोलन सोशल मीडिया के माध्यम से संगठित हुआ और सरकार-विरोधी नैरेटिव को व्यापक स्तर पर फैलाया।
हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिका ने हस्तक्षेप किया। अमेरिका ने वहां के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अपहृत कर न्यूयॉर्क ले जाने का दावा किया। अमेरिका की इस कार्रवाई की आलोचना तो की गई, लेकिन वेनेजुएला के लोग इसमें जश्न मनाने का अवसर देख रहे थे। खासकर युवा इस बात से खुश थे कि उन्हें मादुरो के शासन से मुक्ति मिली।
इसी कारण, ईरान के मौजूदा हालात को भी कई विश्लेषक इसी पैटर्न में देखने लगे हैं। ईरान में हाल के प्रदर्शनों में युवा, महिलाएं और विश्वविद्यालयों की भागीदारी ने खामेनेई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश की है। 60 से ज्यादा घंटों से देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं ठप हैं। अमेरिका ने ईरान में चल रहे इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है और खामेनेई सरकार को चेतावनी दी है कि यदि सरकार प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करेगी तो अमेरिका कदम उठाएगा।
इन आंदोलनों में अमेरिका की अप्रत्यक्ष भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ईरान, वेनेजुएला, नेपाल और बांग्लादेश में अमेरिकी बयानों ने सबका ध्यान खींचा है। हालांकि, अमेरिका की प्रत्यक्ष भागीदारी के ठोस सबूतों का अभाव है, जिससे इन अटकलों पर विराम लगाना मुश्किल है।
ईरान के संदर्भ में अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघनों की आलोचना, प्रतिबंधों की नीति और कूटनीतिक दबाव पहले से ही स्पष्ट हैं। इस बीच, तेहरान ने भी आरोप लगाया है कि बाहरी ताकतें आंतरिक अस्थिरता को बढ़ावा दे रही हैं।
भारत में ईरान के दूतावास ने खामेनेई का एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरान पर दबाव बनाने की हर संभव कोशिश की गई, लेकिन खुदा का शुक्र है कि इस्लामिक रिपब्लिक आज भी ताकतवर है।
खामेनेई वीडियो में कहते हैं, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान आज दुनिया में मजबूत, शक्तिशाली और खुशहाल है, उनकी इच्छा के विपरीत। पिछले 40 वर्षों में उन्होंने जो भी किया, वह असफल रहा है।"
उन्होंने कहा, "उन्होंने सैन्य, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक और श्रमिक हमले किए। कुछ कमजोर लोगों ने पिछले कुछ वर्षों में अपने पैसे से यह सब किया और वे हार गए। आज ईरान पर इस्लामिक रिपब्लिक का राज है। यह इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान है।"