8 अक्टूबर 2026
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मध्य प्रदेश में सघन टीबी स्क्रीनिंग से 1.12 लाख मरीजों की पहचान, JOSH टीम का शुभारंभ

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मध्य प्रदेश में सघन टीबी स्क्रीनिंग से 1.12 लाख मरीजों की पहचान, JOSH टीम का शुभारंभ

सारांश

मध्य प्रदेश में सघन टीबी स्क्रीनिंग ने आँकड़े चौंकाने वाले हैं — जहाँ पहले सालाना 25-30 हजार मरीज चिह्नित होते थे, वहीं अब 1.12 लाख मरीजों की पहचान हो चुकी है। JOSH टीम के शुभारंभ से युवाओं को इस मिशन से जोड़ा जा रहा है, जो 2047 तक टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश में सघन स्क्रीनिंग अभियान से अब तक 1.12 लाख टीबी मरीजों की समय पर पहचान हुई; पहले यह संख्या 25,000–30,000 तक सीमित थी।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 8 अक्टूबर 2026 को भोपाल में JOSH (Joint Squad for Health) टीम का शुभारंभ किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली से JOSH टीम का राष्ट्रव्यापी वर्चुअल शुभारंभ किया।
'माय भारत' के स्वयंसेवक और NCC कैडेट्स ब्लॉक व जिला स्तर पर घर-घर स्क्रीनिंग में सहयोग करेंगे।
टीबी के साथ ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फैटी लिवर और सिकल सेल एनीमिया की भी निःशुल्क स्क्रीनिंग जारी।
8 ग्राम पंचायतों , 3 निक्षय मित्रों और 5 स्वास्थ्य अधिकारियों को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।

मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 8 अक्टूबर 2026 को भोपाल के गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में जानकारी दी कि प्रदेश में चल रहे सघन टीबी स्क्रीनिंग अभियान के परिणामस्वरूप अब तक 1.12 लाख टीबी मरीजों की समय पर पहचान की जा चुकी है। इसी अवसर पर युवाओं की भागीदारी से चलने वाली JOSH (Joint Squad for Health) टीम का राज्य स्तर पर शुभारंभ भी किया गया।

स्क्रीनिंग अभियान की उपलब्धि

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने बताया कि व्यापक स्क्रीनिंग से पहले मध्य प्रदेश में केवल 25,000 से 30,000 टीबी मरीज ही प्रतिवर्ष चिह्नित हो पाते थे। सघन अभियान के बाद यह संख्या बढ़कर 1.12 लाख हो गई है, जो पहले के मुकाबले लगभग चार गुना अधिक है। समय पर पहचान होने से मरीजों का उपचार भी समय पर शुरू हो सका है, जिससे बीमारी की गंभीरता और प्रसार को सीमित किया जा रहा है।

JOSH टीम और युवाओं की भूमिका

उपमुख्यमंत्री शुक्ल के अनुसार, JOSH टीमें युवाओं की शक्ति को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल हैं। 'माय भारत' के स्वयंसेवकों और NCC कैडेट्स की ब्लॉक एवं जिला स्तर पर गठित टीमें घर-घर स्क्रीनिंग में सहयोग करेंगी। ये टीमें संभावित मरीजों की पहचान करने, जन-जागरूकता फैलाने और स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों को जोड़ने में भूमिका निभाएंगी। राष्ट्रव्यापी स्तर पर JOSH टीम का वर्चुअल शुभारंभ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने नई दिल्ली से किया।

टीबी मुक्त भारत और 2047 का लक्ष्य

शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य के साथ वर्ष 2047 तक विकसित और स्वस्थ भारत के निर्माण का संकल्प लिया गया है। उन्होंने बताया कि निक्षय मित्रों के सहयोग, 6 माह की नियमित दवा और पौष्टिक आहार की मदद से टीबी मरीज पूर्णतः स्वस्थ होकर 'टीबी चैंपियन' बन रहे हैं।

व्यापक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और अन्य बीमारियाँ

उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में टीबी के साथ-साथ गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फैटी लिवर और सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग का भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार निःशुल्क जाँच एवं दवाएं उपलब्ध करा रही है, लेकिन उनके अनुसार इन सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए जन-जागरूकता और जन-भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के समय पर एंटी-नेटल चेकअप (ANC) और ग्राम पंचायतों की विशेष सतर्कता पर भी जोर दिया।

सम्मान और उपस्थिति

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य के लिए 8 टीबी मुक्त ग्राम पंचायतों, 3 निक्षय मित्रों तथा 5 स्वास्थ्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल भी उपस्थित रहे। यदि सघन स्क्रीनिंग की यह रफ्तार बनी रही, तो मध्य प्रदेश 2047 से पहले ही टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य को छू सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितने मरीजों ने पूरा 6 माह का उपचार पूरा किया — क्योंकि पहचान और उपचार की पूर्णता दो अलग मापदंड हैं। भारत में टीबी उपचार छोड़ने की दर (treatment dropout rate) ऐतिहासिक रूप से चुनौतीपूर्ण रही है, और JOSH जैसी युवा-केंद्रित टीमें तभी प्रभावी होंगी जब इन्हें दीर्घकालिक अनुवर्ती (follow-up) तंत्र से जोड़ा जाए। निक्षय मित्र मॉडल की दिशा सही है, परंतु स्वयंसेवी ढाँचों पर निर्भरता के बजाय संस्थागत जवाबदेही का ढाँचा और मजबूत होना जरूरी है।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में टीबी स्क्रीनिंग अभियान का क्या परिणाम निकला है?
सघन स्क्रीनिंग अभियान के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश में अब तक 1.12 लाख टीबी मरीजों की समय पर पहचान की जा चुकी है। पहले यह संख्या मात्र 25,000 से 30,000 प्रतिवर्ष तक सीमित थी।
JOSH टीम क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
JOSH यानी Joint Squad for Health एक युवा-केंद्रित स्वास्थ्य पहल है, जिसमें 'माय भारत' के स्वयंसेवक और NCC कैडेट्स ब्लॉक व जिला स्तर पर घर-घर स्क्रीनिंग करते हैं। इसका उद्देश्य संभावित टीबी मरीजों की पहचान, जागरूकता और उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना है।
टीबी उन्मूलन में निक्षय मित्र की क्या भूमिका है?
निक्षय मित्र वे स्वयंसेवी व्यक्ति या संस्थाएं हैं जो टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार, नैतिक सहयोग और उपचार पूर्ण करने में मदद करते हैं। उपमुख्यमंत्री शुक्ल के अनुसार, इनके सहयोग से मरीज 6 माह का पूरा उपचार लेकर 'टीबी चैंपियन' बन रहे हैं।
मध्य प्रदेश में टीबी के अलावा कौन-सी बीमारियों की स्क्रीनिंग हो रही है?
प्रदेश में ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, फैटी लिवर और सिकल सेल एनीमिया की भी निःशुल्क स्क्रीनिंग का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार निःशुल्क जाँच और दवाएं उपलब्ध करा रही है।
टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य कब तक का है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक निर्धारित किया गया है, जो विकसित और स्वस्थ भारत के व्यापक संकल्प का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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