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मदुरै चिथिरई उत्सव 2025: भगवान कल्लाझगर ने वैगई नदी में किया प्रवेश, लाखों श्रद्धालु उमड़े

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मदुरै चिथिरई उत्सव 2025: भगवान कल्लाझगर ने वैगई नदी में किया प्रवेश, लाखों श्रद्धालु उमड़े

सारांश

मदुरै का चिथिरई उत्सव इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना। भगवान कल्लाझगर का सुनहरे घोड़े पर वैगई नदी में प्रवेश — शैव और वैष्णव परंपराओं के सदियों पुराने मिलन का जीवंत प्रतीक — इस बार भी भव्यता और भक्ति का अद्भुत संगम बना।

मुख्य बातें

भगवान कल्लाझगर ने 1 मई को सुबह 5:35 से 5:55 बजे के बीच सुनहरे घोड़े पर सवार होकर वैगई नदी में प्रवेश किया।
चिथिरई उत्सव मीनाक्षी अम्मन मंदिर से कल्लाझगर मंदिर तक लगभग 18 किलोमीटर की यात्रा को समेटता है।
उत्सव की शुरुआत 19 अप्रैल को ध्वजारोहण से हुई; कल्लाझगर मंदिर में आयोजन 27 अप्रैल से आरंभ हुआ।
उत्सव का समापन 6 मई को पारंपरिक समापन समारोहों के साथ होगा।
प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

तमिलनाडु के मदुरै में विश्व प्रसिद्ध चिथिरई उत्सव पूरी भव्यता और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। 1 मई को उत्सव के सबसे प्रतीक्षित क्षण में भगवान कल्लाझगर ने सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 55 मिनट के बीच सुनहरे घोड़े पर सवार होकर वैगई नदी में प्रवेश किया। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए नदी तट पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित हुए।

मुख्य घटनाक्रम

वैगई नदी के तट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की अपार भीड़ जमा हो गई थी। हाथों में दीपक लिए भक्तों ने नदी किनारे आयोजित पवित्र अनुष्ठानों में श्रद्धापूर्वक भाग लिया और पूजा-अर्चना की। परमकुडी में सुंदरराजा पेरुमल के औपचारिक प्रवेश के अवसर पर भी हजारों श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहाँ धार्मिक अनुष्ठानों और परंपरागत आयोजनों का भव्य क्रम जारी रहा।

उत्सव की परंपरा और ऐतिहासिक महत्व

पारंपरिक रूप से इस उत्सव की शुरुआत मीनाक्षी अम्मन मंदिर से होती है और यह लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित कल्लाझगर मंदिर तक पहुँचता है। यह आयोजन हिंदू पूजा-पद्धति की दो प्रमुख धाराओं — शैव और वैष्णव — के मिलन का सदियों पुराना प्रतीक है। गौरतलब है कि मीनाक्षी मंदिर में चिथिरई उत्सव की शुरुआत 19 अप्रैल को ध्वजारोहण की रस्म के साथ हुई थी, जबकि कल्लाझगर मंदिर में उत्सव 27 अप्रैल को आरंभ हुआ।

श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया

एक श्रद्धालु ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि सुबह से इंतजार के बाद भगवान के दर्शन करना अत्यंत संतोषजनक और दिव्य अनुभव रहा। एक अन्य श्रद्धालु ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शैव-वैष्णव एकता की उस सदियों पुरानी परंपरा का जीवंत प्रमाण है जिसे आधुनिक सांप्रदायिक विमर्श अक्सर नजरअंदाज करता है। यह उत्सव यह भी दर्शाता है कि तमिलनाडु की सांस्कृतिक पहचान धार्मिक विविधता में एकता की कितनी गहरी जड़ें रखती है। हालाँकि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ और सुरक्षा प्रबंधन की चुनौती हर वर्ष प्रशासन की परीक्षा लेती है, इस बार श्रद्धालुओं की सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यवस्था की सफलता का संकेत देती है।
RashtraPress
29 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिथिरई उत्सव क्या है और यह मदुरै में क्यों मनाया जाता है?
चिथिरई उत्सव तमिलनाडु के मदुरै में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला विश्व प्रसिद्ध धार्मिक उत्सव है। यह शैव और वैष्णव परंपराओं के मिलन का प्रतीक है और मीनाक्षी अम्मन मंदिर से कल्लाझगर मंदिर तक लगभग 18 किलोमीटर की यात्रा को समेटता है।
भगवान कल्लाझगर ने वैगई नदी में कब प्रवेश किया?
भगवान कल्लाझगर ने 1 मई को सुबह 5 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 55 मिनट के बीच सुनहरे घोड़े पर सवार होकर वैगई नदी में प्रवेश किया। इस दिव्य दृश्य को देखने के लिए नदी तट पर लाखों श्रद्धालु एकत्रित हुए।
चिथिरई उत्सव 2025 कब शुरू हुआ और कब समाप्त होगा?
मीनाक्षी अम्मन मंदिर में चिथिरई उत्सव की शुरुआत 19 अप्रैल को ध्वजारोहण की रस्म के साथ हुई और कल्लाझगर मंदिर में उत्सव 27 अप्रैल से आरंभ हुआ। उत्सव का समापन 6 मई को पारंपरिक समारोहों के साथ होगा।
चिथिरई उत्सव में शैव और वैष्णव परंपराओं का क्या महत्व है?
यह उत्सव हिंदू पूजा-पद्धति की दो प्रमुख धाराओं — शैव और वैष्णव — के सदियों पुराने मिलन का प्रतीक है। मीनाक्षी अम्मन मंदिर शैव परंपरा का और कल्लाझगर मंदिर वैष्णव परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, और यह उत्सव दोनों को एकता के सूत्र में पिरोता है।
चिथिरई उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कैसी है?
प्रशासन द्वारा उत्सव के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। श्रद्धालुओं ने पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था की सराहना की है और नई अवसंरचना जैसे पुल निर्माण का भी उल्लेख किया है।
राष्ट्र प्रेस
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