मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव परिणाम 9 अक्टूबर को, विजय सरकार की पहली चुनावी अग्निपरीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
मदुरंतकम और धारापुरम विधानसभा उपचुनावों के नतीजे 9 अक्टूबर 2026 को घोषित होंगे — और ये परिणाम मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा माने जा रहे हैं। दोनों सीटें अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षित हैं और इन पर 6 अक्टूबर को मतदान संपन्न हुआ था।
मतगणना की प्रक्रिया
मतगणना शुक्रवार सुबह 8 बजे से शुरू होगी। सबसे पहले डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलेट) की गिनती की जाएगी, उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में दर्ज वोटों की गिनती होगी। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में प्रमुख दलों ने जोरदार चुनाव प्रचार किया था, जिससे इन सीटों का राजनीतिक महत्व और अधिक बढ़ गया।
TVK के लिए क्यों है यह निर्णायक
तमिलगा वेट्री कझगम ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी, लेकिन पार्टी के पास अभी पूर्ण बहुमत नहीं है। यदि दोनों TVK उम्मीदवार जीतते हैं तो विधानसभा में पार्टी की स्थिति और मज़बूत हो जाएगी। वहीं, हार की स्थिति में विपक्षी दलों को सरकार की नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाने का राजनीतिक अवसर मिल सकता है।
प्रचार में उतरे दिग्गज नेता
TVK उम्मीदवारों के पक्ष में स्वयं मुख्यमंत्री विजय ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली। दूसरी ओर, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) अध्यक्ष एम.के. स्टालिन और उनके पुत्र उदयनिधि स्टालिन ने अपने उम्मीदवारों के लिए मैदान संभाला। अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी अपने दल के प्रत्याशियों के समर्थन में ताबड़तोड़ सभाएँ कीं।
दलबदल का कारक
गौरतलब है कि TVK के दोनों उम्मीदवारों ने विधानसभा चुनाव में AIADMK के टिकट पर ये सीटें जीती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी बदलकर TVK का दामन थाम लिया। इस दलबदल ने इन उपचुनावों को व्यक्तिगत विश्वसनीयता की परीक्षा में भी बदल दिया है — मतदाताओं का फैसला बताएगा कि वे पार्टी को वोट देते हैं या व्यक्ति को।
कम मतदान की चिंता और आगे की राह
दोनों सीटों पर अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत ने सभी राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई है। हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार केवल मतदान के आँकड़ों से यह नहीं बताया जा सकता कि कम वोटिंग किस पार्टी को लाभ या हानि पहुँचाएगी — और क्या युवा मतदाताओं की अनुपस्थिति इसका मुख्य कारण है। नतीजे आने के बाद ही तस्वीर साफ़ होगी। यह तय है कि 9 अक्टूबर के ये नतीजे तमिलनाडु की राजनीति में आने वाले दिनों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएँगे।