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क्या माघ मेले में कल्पवास के बाद हो रहा है शैय्या दान?

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क्या माघ मेले में कल्पवास के बाद हो रहा है शैय्या दान?

सारांश

प्रयागराज में माघ मेले के दौरान भक्तों द्वारा कल्पवास के बाद शैय्या दान किए जाने का महत्व है। यह पापों से मुक्ति पाने और धार्मिक अनुष्ठानों का एक हिस्सा है। जानिए इसके पीछे की गहराई और धार्मिक महत्व।

मुख्य बातें

कल्पवास धार्मिक अनुष्ठान है जो पापों से मुक्ति दिलाता है।
शैय्या दान का महत्व प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है।
भक्तगण संगम के तट पर ध्यान और पूजा करते हैं।
12 साल का कल्पवास मोक्ष की ओर ले जाता है।
दान केवल पुरोहित द्वारा लिया जा सकता है।

प्रयागराज, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मेले में कल्पवास का अत्यधिक महत्व है। भक्तगण अपने पापों से मुक्ति पाने और अपनी गलतियों का पश्चाताप करने के लिए कल्पवास करते हैं।

यह माना जाता है कि कल्पवास के साथ शैय्या दान (सेझिया दान) भी आवश्यक है। अब संगम के तट पर माघ महीने में भक्त कल्पवास के बाद शैय्या दान कर रहे हैं, जिसमें घर में उपयोग होने वाली सभी प्रकार की वस्तुएं दान की जाती हैं।

दंडी स्वामी महेशाश्रम महाराज ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि माघ मेले में भक्त कल्पवास करने आते हैं और जो भक्त 12 साल का कल्पवास करता है, उसे 12 साल बाद शैय्या दान करना अनिवार्य है। शैय्या दान को ग्रंथों में पश्चाताप का दान कहा गया है, जिसका उद्देश्य पापों का नाश करना और पुरानी गलतियों की माफी है। यदि 12 साल का कल्पवास किया जाए तो जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाती है और जातक मोक्ष को प्राप्त कर लेता है।

तीर्थ पुरोहित प्रयागराज विनय मिश्रा ने कहा, "कल्पवास तभी पूर्ण माना जाता है जब शैय्या दान किया जाता है। यह पापों से मुक्ति का मार्ग है, और हर साल भक्त माघ मेले में प्रयागराज आकर दान करते हैं।" यह दान सभी ब्राह्मणों को लेने का अधिकार नहीं होता है, इसे केवल कुल के पुरोहित ही ले सकते हैं। शैय्या दान में वे वस्तुएं दी जाती हैं, जो आम आदमी अपनी दैनिक जिंदगी में इस्तेमाल करता है। पहले लोग 3, 5 और 12 साल का कल्पवास करते थे, लेकिन अब स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से करते हैं।

यह ध्यान देने योग्य है कि कल्पवास में किया गया शैय्या दान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिसे पौष माह के 11वें दिन से प्रारंभ होकर माघ माह के 12वें दिन तक किया जा सकता है। कल्पवास में भक्त संगम के तट पर देवताओं का पूजन और ध्यान करते हैं, और फिर दान देकर कल्पवास की प्रक्रिया को पूरा करते हैं। शास्त्रों में कल्पवास की न्यूनतम अवधि एक दिन, तीन दिन, तीन महीने, छह महीने, 2 साल, 3 साल और 12 साल की भी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह व्यक्तियों को अपने पापों से मुक्ति पाने और आत्मा की शुद्धि के लिए प्रेरित करता है। यह एक ऐसा अवसर है जब भक्तगण एकजुट होकर अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शैय्या दान का महत्व क्या है?
शैय्या दान को पापों का प्रायश्चित और मोक्ष का मार्ग माना जाता है।
माघ मेले में दान कब किया जाता है?
माघ मेले में शैय्या दान पौष माह के 11वें दिन से प्रारंभ होकर माघ माह के 12वें दिन तक किया जाता है।
क्या सभी ब्राह्मण शैय्या दान ले सकते हैं?
नहीं, शैय्या दान केवल कुल के पुरोहित ही ले सकते हैं।
कल्पवास की न्यूनतम अवधि क्या है?
कल्पवास की न्यूनतम अवधि एक दिन से लेकर 12 साल तक होती है।
राष्ट्र प्रेस
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