महाराष्ट्र राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' से डिजिटल जनगणना 2027 की शुरुआत की

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महाराष्ट्र राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' से डिजिटल जनगणना 2027 की शुरुआत की

सारांश

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने 1 मई को स्थापना दिवस पर डिजिटल जनगणना 2027 का शुभारंभ किया। 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' पद्धति पहली बार लागू होगी, जिसमें नागरिक खुद अपनी जानकारी दर्ज करेंगे — यह भारत की जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल क्रांति की शुरुआत है।

Key Takeaways

राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र स्थापना दिवस पर डिजिटल जनगणना 2027 का शुभारंभ किया। पहली बार ' सेल्फ-एन्यूमरेशन ' पद्धति लागू होगी, जिसमें नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे। राज्यपाल ने ' हमारी जनगणना, हमारा विकास ' का नारा दिया और सभी से बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की। कार्यक्रम में महाराष्ट्र की मुख्य जनगणना अधिकारी डॉ. निरुपमा जे. डांगे , अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. विपिन शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। डिजिटल जनगणना की रूपरेखा पहले ही तय की जा चुकी थी; अब इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हुई है।

महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर मुंबई के लोक भवन में डिजिटल जनगणना 2027 की औपचारिक शुरुआत की। यह पहली बार है जब राज्य के स्थापना दिवस पर इस ऐतिहासिक डिजिटल प्रक्रिया का शुभारंभ किया गया। जनगणना अब 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' पद्धति के तहत संचालित होगी, जिसमें नागरिक स्वयं अपनी व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे।

क्या है 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' पद्धति

परंपरागत जनगणना प्रक्रिया में सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करते थे। अब डिजिटल युग में इस पूरी प्रक्रिया को बदल दिया गया है। 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' के तहत नागरिकों को अपनी समस्त व्यक्तिगत जानकारी स्वयं दर्ज करनी होगी, जिससे जनगणना अधिक सटीक, पारदर्शी और समयबद्ध होने की उम्मीद है। यह बदलाव भारत में डिजिटल शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

राज्यपाल का संबोधन और अपील

राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा,

Point of View

लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्रामीण और डिजिटल रूप से वंचित आबादी तक यह प्रक्रिया कैसे पहुँचती है। भारत में अभी भी करोड़ों लोगों के पास स्मार्टफोन या इंटरनेट की सुलभ पहुँच नहीं है — ऐसे में केवल ऑनलाइन स्व-पंजीकरण पर निर्भरता डेटा की समग्रता को प्रभावित कर सकती है। 2021 की जनगणना पहले ही कोविड के कारण वर्षों विलंबित हो चुकी है, और 2027 की समयसीमा भी महत्वाकांक्षी लगती है। सरकार को डिजिटल साक्षरता अभियान और ऑफलाइन विकल्प के साथ इस प्रक्रिया को सुदृढ़ करना होगा, अन्यथा 'हमारी जनगणना, हमारा विकास' का नारा महज़ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
NationPress
01/05/2026

Frequently Asked Questions

महाराष्ट्र में डिजिटल जनगणना 2027 की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
महाराष्ट्र में डिजिटल जनगणना 2027 की शुरुआत 1 मई 2026 को महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर मुंबई के लोक भवन में हुई। राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा ने इस प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ किया।
'सेल्फ-एन्यूमरेशन' जनगणना पद्धति क्या है?
'सेल्फ-एन्यूमरेशन' एक डिजिटल प्रक्रिया है जिसमें नागरिक स्वयं अपनी व्यक्तिगत जानकारी ऑनलाइन दर्ज करते हैं। पहले जनगणना में सरकारी कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा एकत्र करते थे, लेकिन अब यह जिम्मेदारी नागरिकों को स्वयं दी गई है।
डिजिटल जनगणना 2027 से महाराष्ट्र के विकास पर क्या असर पड़ेगा?
राज्यपाल जिष्णुदेव वर्मा के अनुसार, जनगणना से ही आगामी दिनों में प्रदेश के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। सटीक जनसंख्या डेटा से सरकारी योजनाओं का बेहतर नियोजन और संसाधनों का उचित वितरण संभव होगा।
डिजिटल जनगणना के उद्घाटन कार्यक्रम में कौन-कौन मौजूद थे?
इस अवसर पर राज्यपाल की पत्नी सुधा देव वर्मा, अतिरिक्त नगर आयुक्त (पश्चिमी उपनगर) डॉ. विपिन शर्मा, महाराष्ट्र की मुख्य जनगणना अधिकारी डॉ. निरुपमा जे. डांगे, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवारे, उप रजिस्ट्रार जनरल ए. एन. राजीव और उप रजिस्ट्रार जनरल यशवंत पाटिल उपस्थित थे।
भारत में डिजिटल जनगणना की रूपरेखा कब तय हुई थी?
भारत में डिजिटल जनगणना की पूरी रूपरेखा काफी पहले ही निर्धारित की जा चुकी थी। अब 1 मई 2026 को महाराष्ट्र से इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू हुई है।
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