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विदर्भ राज्य की मांग: नागपुर के संविधान चौक पर महाराष्ट्र दिवस का विरोध, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

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विदर्भ राज्य की मांग: नागपुर के संविधान चौक पर महाराष्ट्र दिवस का विरोध, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया

सारांश

महाराष्ट्र के 66वें स्थापना दिवस पर नागपुर के संविधान चौक पर विदर्भ समर्थकों ने काले झंडे और गुब्बारों के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन दशकों पुरानी उस माँग की याद दिलाता है जो 1960 में बॉम्बे राज्य के विभाजन के बाद भी अनसुलझी रही।

मुख्य बातें

1 मई 2026 को महाराष्ट्र स्थापना दिवस पर नागपुर के संविधान चौक पर अलग विदर्भ राज्य की माँग को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ।
प्रदर्शनकारियों ने काले झंडे लहराए और काले गुब्बारे हवा में छोड़कर 'महाराष्ट्र दिवस' का विरोध किया।
नागपुर पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वहाँ से हटाया।
1 मई 1960 को बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद बॉम्बे राज्य से महाराष्ट्र और गुजरात का गठन हुआ था।
विदर्भ क्षेत्र लंबे समय से खुद को महाराष्ट्र के भीतर उपेक्षित महसूस करता आया है।

महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर नागपुर के संविधान चौक पर 1 मई 2026 की सुबह अलग विदर्भ राज्य की मांग को लेकर बड़ी संख्या में युवा प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और जोरदार हंगामा किया। काले झंडे लहराते और काले गुब्बारे हवा में छोड़ते हुए प्रदर्शनकारियों ने 'महाराष्ट्र दिवस' के विरोध में नारेबाज़ी की, जिसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेते हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वाहनों में बिठाकर वहाँ से ले गई।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शनकारी शुक्रवार सुबह अचानक अलग-अलग दिशाओं से संविधान चौक, नागपुर पर एकत्रित हो गए। उन्होंने अपने साथ लाए काले झंडे लहराए और काले गुब्बारे हवा में छोड़े, जो उनके विरोध का प्रतीक था। इस अचानक हुए प्रदर्शन के कारण पुलिस को स्थिति सँभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। हालाँकि, बाद में पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वाहनों में बिठाकर वहाँ से ले गई।

विदर्भ की पुरानी माँग और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

महाराष्ट्र में अलग विदर्भ राज्य बनाने की माँग लंबे समय से उठती रही है। गौरतलब है कि 1 मई 1960 को ही बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद बॉम्बे राज्य का विभाजन हुआ था और महाराष्ट्र तथा गुजरात — दो अलग राज्यों का गठन हुआ था। यह विभाजन भाषाई आधार पर हुए लंबे आंदोलन का परिणाम था, जो कुछ मामलों में हिंसा तक पहुँच गया था।

तत्कालीन सरकार ने बढ़ते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम तैयार करने का निर्णय लिया था। संसद में विधेयक पारित होने के बाद यह कानून बना और 1 मई 1960 को लागू हुआ। तब से प्रत्येक वर्ष 1 मई को गुजरात और महाराष्ट्र स्थापना दिवस मनाया जाता है।

विदर्भ क्षेत्र की उपेक्षा का सवाल

विदर्भ क्षेत्र के समर्थक लंबे समय से यह तर्क देते आए हैं कि महाराष्ट्र के भीतर उनके क्षेत्र की उपेक्षा होती रही है। विकास के मामले में पश्चिमी महाराष्ट्र की तुलना में विदर्भ पिछड़ा हुआ है — यह बात समर्थक अलग राज्य की माँग के पक्ष में बार-बार उठाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य भर में उत्सव का माहौल था।

पुलिस की प्रतिक्रिया

नागपुर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए प्रदर्शन स्थल पर भारी बल तैनात किया। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर वाहनों में बिठाया गया और वहाँ से हटाया गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद संविधान चौक पर स्थिति नियंत्रण में आ गई। फिलहाल हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की संख्या के बारे में अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

आगे क्या

विदर्भ अलग राज्य की माँग आज के इस प्रदर्शन के साथ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार इस माँग पर क्या रुख अपनाती हैं और क्या आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज़ होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब बॉम्बे राज्य के विभाजन के समय इस क्षेत्र की आकांक्षाएँ अधूरी रह गई थीं। हर साल महाराष्ट्र स्थापना दिवस पर इस माँग का उभरना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय असंतोष को अब तक ठोस नीतिगत जवाब नहीं मिला है। विकास के आँकड़े भी इस भावना को बल देते हैं — विदर्भ के किसानों की आत्महत्याएँ और बुनियादी ढाँचे की कमी दशकों से चर्चा में है, लेकिन समाधान नहीं। जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस असंतोष को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर चलती रहेंगी, तब तक हर 1 मई को संविधान चौक पर यही दृश्य दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदर्भ अलग राज्य की माँग क्या है?
विदर्भ महाराष्ट्र का एक पूर्वी क्षेत्र है जिसके समर्थक लंबे समय से इसे एक अलग राज्य बनाने की माँग करते आए हैं। उनका तर्क है कि 1960 में महाराष्ट्र बनने के बाद से इस क्षेत्र को विकास और सरकारी संसाधनों के मामले में उपेक्षित रखा गया है।
नागपुर में 1 मई 2026 को क्या हुआ?
महाराष्ट्र स्थापना दिवस पर नागपुर के संविधान चौक पर विदर्भ अलग राज्य की माँग को लेकर युवा प्रदर्शनकारी जमा हो गए। उन्होंने काले झंडे लहराए और काले गुब्बारे छोड़े, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर वहाँ से हटाया।
महाराष्ट्र का गठन कब और कैसे हुआ?
1 मई 1960 को बॉम्बे पुनर्गठन अधिनियम लागू होने के बाद बॉम्बे राज्य का विभाजन हुआ और महाराष्ट्र तथा गुजरात — दो अलग राज्यों का गठन हुआ। यह विभाजन भाषाई आधार पर चले लंबे आंदोलन का परिणाम था।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ क्या किया?
नागपुर पुलिस ने संविधान चौक पर जमा हुए सभी प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और वाहनों में बिठाकर वहाँ से ले गई। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई।
विदर्भ आंदोलन का भविष्य क्या है?
यह माँग दशकों पुरानी है और हर साल महाराष्ट्र स्थापना दिवस पर इसे नए सिरे से उठाया जाता है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई ठोस नीतिगत प्रतिक्रिया नहीं आई है, इसलिए आंदोलन जारी रहने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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