क्या महाराष्ट्र की राजनीति में उद्धव ठाकरे सच में ‘जयचंद’ हैं?: संजय निरुपम
सारांश
Key Takeaways
- उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर सवाल उठाए गए हैं।
- एकनाथ शिंदे ने शिवसेना को पुनः जोड़ा है।
- कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो चुकी है।
- महायुति गठबंधन से अगला मेयर होगा।
- राजनीतिक बयानबाजी का महत्व है।
मुंबई, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत द्वारा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को ‘जयचंद’ कहे जाने के बाद शिवसेना के नेता संजय निरुपम ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर महाराष्ट्र की राजनीति में वास्तव में कोई ‘जयचंद’ है, तो वह उद्धव ठाकरे हैं।
निरुपम ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में 2019 की घटनाओं को याद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पद की चाह में उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और शरद पवार के साथ गठबंधन कर शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व विचारधारा से समझौता किया, जो एक बड़ा धोखा था। इस निर्णय ने शिवसेना में भारी निराशा और पीड़ा उत्पन्न की और पार्टी की वैचारिक पहचान को नुकसान पहुँचाया।
इस अस्थिरता को डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने ठीक किया। उन्होंने शिवसेना को पुनः भारतीय जनता पार्टी के साथ जोड़ा और हिंदुत्व के सिद्धांतों पर आधारित सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निरुपम ने कहा कि शिवसेना की मूल विचारधारा के सच्चे वारिस के रूप में शिंदे ने एक साहसिक कदम उठाया, जबकि उद्धव ठाकरे ने गद्दारी की राजनीति की। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत इसी प्रकार के नकारात्मक और भ्रामक प्रचार में संलग्न रहते हैं, लेकिन इससे उनकी पार्टी की स्थिति और भी खराब होती जा रही है।
निरुपम ने आगे कहा कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और शरद पवार गुट की स्थिति कमजोर हो चुकी है। उन्होंने मजाक में कहा कि कांग्रेस लगभग समाप्त हो चुकी है और शरद पवार की राजनीतिक हैसियत भी नगरसेवक स्तर तक सीमित रह गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन दलों और नेताओं ने इस तरह की बयानबाजी बंद नहीं की, तो उनकी बाकी बची हुई साख भी समाप्त हो जाएगी।
मुंबई के मेयर पद को लेकर चल रही चर्चाओं पर संजय निरुपम ने स्पष्ट किया कि अगला मेयर महायुति गठबंधन से ही होगा। उन्होंने कहा कि जो भी मेयर बनेगा, वह शिवसेना के समर्थन के बिना संभव नहीं है। निरुपम ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक बड़ी पार्टी है और उसके पास अधिक नगरसेवक हैं, इसलिए यदि भाजपा से कोई नाम सामने आता है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने फिर से दोहराया कि शिवसेना के समर्थन के बिना कोई मेयर नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना के रिश्तों को लेकर अटकलों में पड़ने के बजाय यह समझना चाहिए कि मुंबई का अगला मेयर महायुति गठबंधन से होगा।