26 जून 2026
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महाराष्ट्र को 'काऊ बेल्ट' बनाने की साजिश में महायुति: कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का बड़ा आरोप

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महाराष्ट्र को 'काऊ बेल्ट' बनाने की साजिश में महायुति: कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का बड़ा आरोप

सारांश

महाराष्ट्र दिवस पर कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने महायुति पर तीखा हमला बोला — आरोप लगाया कि शिवाजी, फुले और अंबेडकर की विरासत वाले प्रगतिशील महाराष्ट्र को जानबूझकर 'काऊ बेल्ट' में बदला जा रहा है। परिसीमन से लेकर सांप्रदायिक फूट तक, कांग्रेस ने सांस्कृतिक पहचान को अपना चुनावी हथियार बना लिया है।

मुख्य बातें

हर्षवर्धन सपकाल ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस पर महायुति पर महाराष्ट्र को 'काऊ बेल्ट' बनाने की साजिश का आरोप लगाया।
उन्होंने परिसीमन को राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र का राजनीतिक महत्व घटाने की कोशिश बताया।
सपकाल ने कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, सूखा प्रबंधन और भ्रष्टाचार में सरकारी विफलता को 'मिसिंग लिंक' कहा।
महाविकास अघाड़ी (MVA) की एकता दोहराई और कांग्रेस को संख्या बल के आधार पर नेतृत्व का दावेदार बताया।
'इंडिया' गठबंधन को राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत ताकत बताते हुए राज्य में कांग्रेस के उचित प्रतिनिधित्व की माँग की।

महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस और मजदूर दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि महायुति एक सुनियोजित साजिश के तहत छत्रपति शिवाजी महाराज, राजर्षि शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और बाबासाहेब अंबेडकर के आदर्शों पर खड़े प्रगतिशील महाराष्ट्र को 'काऊ बेल्ट' में तब्दील करने की कोशिश कर रही है। मुंबई में आयोजित इस कार्यक्रम में सपकाल ने नागरिकों से एकजुट होने का आह्वान किया।

काऊ बेल्ट से क्या आशय है

सपकाल के भाषण में इस्तेमाल 'काऊ बेल्ट' शब्द उत्तर और मध्य भारत के उन राज्यों के लिए प्रयुक्त होता है जहाँ हिंदी प्रमुख भाषा है और गाय को उच्च धार्मिक व सांस्कृतिक महत्ता प्राप्त है। सपकाल ने इस शब्द का उपयोग यह संकेत देने के लिए किया कि महाराष्ट्र की अपनी प्रगतिशील पहचान को जानबूझकर कमज़ोर किया जा रहा है।

महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत पर ज़ोर

सपकाल ने राज्य की समृद्ध विरासत को रेखांकित करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की धरती छत्रपति शिवाजी महाराज, राजर्षि शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और बाबासाहेब अंबेडकर के विचारों से बनी है। उन्होंने यह भी कहा कि यह वारकरी संप्रदाय की समानता की शिक्षाओं से धन्य भूमि है। उनके अनुसार, यह पहचान आज खतरे में है और इसे बचाना हर महाराष्ट्रीयन का दायित्व है।

परिसीमन और राजनीतिक महत्व पर चिंता

सपकाल ने आरोप लगाया कि परिसीमन जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग राष्ट्रीय स्तर पर महाराष्ट्र के राजनीतिक प्रभाव को घटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार असली मुद्दों — जैसे कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, सूखा प्रबंधन और भ्रष्टाचार — से ध्यान भटकाने के लिए जातियों और धर्मों के बीच फूट डाल रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि असली 'मिसिंग लिंक' राज्य के प्रशासन में ही मौजूद है।

महाविकास अघाड़ी की एकता का संदेश

सपकाल ने महाविकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन की ताकत को दोहराते हुए संत का दोहा उद्धृत किया — 'एकमेका सहाय्य करू, अवघे धरू सुपंथ' (चलो हम एक-दूसरे की मदद करें और मिलकर सही रास्ता चुनें)। उन्होंने घोषणा की कि कांग्रेस अपनी संख्या बल के आधार पर नेतृत्व करने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर एक मज़बूत ताकत है और सहयोगी दलों ने माना है कि राज्य में कांग्रेस को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में परिसीमन की बहस तेज़ है और MVA अपनी रणनीति को नए सिरे से तैयार कर रहा है। सपकाल के इस आक्रामक भाषण से स्पष्ट है कि कांग्रेस आगामी चुनावी मौसम में सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक विफलताओं को केंद्रीय मुद्दा बनाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस बड़े सवाल से ध्यान भटका सकता है कि MVA ने खुद महाराष्ट्र में सत्ता में रहते हुए सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ठोस क्या किया। परिसीमन की चिंता वैध है — महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य की लोकसभा सीटें यदि आनुपातिक रूप से नहीं बढ़ीं तो यह सचमुच राजनीतिक नुकसान होगा। लेकिन जब कांग्रेस 'मिसिंग लिंक' की बात करती है, तो यह भी पूछा जाना चाहिए कि पिछली MVA सरकार में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के आँकड़े कितने बेहतर थे। सांस्कृतिक विरासत की राजनीति तब विश्वसनीय होती है जब वह नीतिगत ठोसपन के साथ आती हो — अन्यथा यह भी उसी 'बयानबाजी' की श्रेणी में आती है जिसका सपकाल ने महायुति पर आरोप लगाया।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्षवर्धन सपकाल ने महायुति पर क्या आरोप लगाया?
सपकाल ने आरोप लगाया कि महायुति गठबंधन एक सुनियोजित साजिश के तहत प्रगतिशील महाराष्ट्र को 'काऊ बेल्ट' में बदलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन के ज़रिए महाराष्ट्र का राष्ट्रीय राजनीतिक महत्व घटाया जा रहा है।
'काऊ बेल्ट' का क्या अर्थ है और इसे महाराष्ट्र के संदर्भ में क्यों इस्तेमाल किया गया?
'काऊ बेल्ट' उत्तर और मध्य भारत के उन राज्यों को कहा जाता है जहाँ हिंदी प्रमुख भाषा है और गाय को उच्च धार्मिक-सांस्कृतिक महत्ता है। सपकाल ने यह शब्द यह दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया कि महाराष्ट्र की अपनी प्रगतिशील पहचान को जानबूझकर कमज़ोर किया जा रहा है।
महाराष्ट्र दिवस 2026 पर कांग्रेस का मुख्य राजनीतिक संदेश क्या था?
कांग्रेस ने महाराष्ट्र दिवस पर सांस्कृतिक पहचान की रक्षा, महाविकास अघाड़ी की एकता और प्रशासनिक विफलताओं को केंद्रीय मुद्दा बनाया। सपकाल ने घोषणा की कि कांग्रेस संख्या बल के आधार पर MVA में नेतृत्व की दावेदार है।
सपकाल ने सरकार की किन विफलताओं को 'मिसिंग लिंक' बताया?
सपकाल ने कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, सूखा प्रबंधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सरकारी विफलता को 'मिसिंग लिंक' कहा। उन्होंने कहा कि सरकार बयानबाजी करने के बजाय आत्म-मंथन करे।
महाविकास अघाड़ी और 'इंडिया' गठबंधन के बारे में सपकाल ने क्या कहा?
सपकाल ने MVA की एकता की पुष्टि करते हुए कहा कि 'इंडिया' गठबंधन राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत ताकत है। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों ने माना है कि राज्य में कांग्रेस को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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