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महिला आरक्षण विधेयक पर मनीषा राजावत का जोरदार समर्थन, पारदर्शिता और स्वतंत्रता का किया आह्वान

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महिला आरक्षण विधेयक पर मनीषा राजावत का जोरदार समर्थन, पारदर्शिता और स्वतंत्रता का किया आह्वान

सारांश

महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ताओं का आधिकारिक बयान, जिसमें मनीषा राजावत, वंदना व्यास और पारुल भार्गव ने इसकी महत्ता और लागू करने में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया है।

मुख्य बातें

महिला आरक्षण विधेयक एक ऐतिहासिक कदम है।
सही तरीके से लागू करना आवश्यक है।
महिलाओं को सशक्त करने के लिए स्वतंत्रता जरूरी है।
राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ानी चाहिए।
सकारात्मक परिणामों के लिए पारदर्शिता अनिवार्य है।

जयपुर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। जयपुर में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर अपनी खुशी व्यक्त की है, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण बातें भी रखी हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मनीषा राजावत, वंदना व्यास और पारुल भार्गव ने इसे महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम बताया, लेकिन यह भी कहा कि असली चुनौती इसे सही तरीके से लागू करना होगा।

मनीषा राजावत ने कहा कि यह विधेयक काफी लंबे इंतजार के बाद आया है और इसके लिए वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, चाहे वह सामाजिक, आर्थिक या रोजगार का क्षेत्र हो। ऐसे में राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाना अत्यंत आवश्यक था। उन्होंने कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है और अब उन्हें उनके अधिकार मिल रहे हैं।

मनीषा ने कहा कि समय बदल रहा है। पहले महिलाएं केवल नौकरी तलाशने वाली मानी जाती थीं, लेकिन अब वे रोजगार देने वाली बन रही हैं। इसी तरह अब वे नीति निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में लोकसभा और राज्यसभा में महिलाओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी, जिससे देश की दिशा और भी सकारात्मक होगी।

वहीं, वंदना व्यास ने कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं की भागीदारी केवल 14-15 प्रतिशत है, जबकि देश की जनसंख्या में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत है। ऐसे में 33 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त करना एक महत्वपूर्ण और आवश्यक कदम है।

वंदना ने बताया कि जब पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण मिला था, तब भी कई चुनौतियाँ थीं, लेकिन धीरे-धीरे इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से साफ-सफाई, पीने के पानी, और बच्चों की शिक्षा जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया गया और कई सुधार देखने को मिले। उनका मानना है कि यदि यही मॉडल संसद और विधानसभा में लागू होगा, तो महिलाओं और बच्चों से जुड़े विकास के सूचकांकों में काफी सुधार होगा।

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल आरक्षण देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि महिलाएं स्वतंत्र रूप से काम कर सकें। कई बार ऐसा देखा गया है कि महिला प्रतिनिधि के पीछे असल में कोई और निर्णय लेता है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि महिलाओं को सही मायनों में सशक्त बनाया जाए, ताकि वे बिना किसी दबाव या हस्तक्षेप के अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें।

इसी क्रम में, पारुल भार्गव ने भी अपनी राय व्यक्त करते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं के लिए एक बहुत ही सकारात्मक पहल है। उन्होंने भारत सरकार को बधाई देते हुए कहा कि यह कदम महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण है। उनका मानना है कि अब संसद और विधानसभा में महिलाओं की आवाज पहले से अधिक मजबूत होगी और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का मौका मिलेगा।

पारुल ने यह भी कहा कि कई बार इस प्रकार के विधेयकों को लेकर विभिन्न प्रकार की बातें होती हैं, लेकिन यदि सरकार महिलाओं को आगे लाने के लिए कोई कदम उठाती है, तो उसका स्वागत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर महिलाएं खुद आगे आकर कार्य करेंगी, तो इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता है। यह महिलाओं को सशक्त करने का एक अवसर है, लेकिन इस दिशा में पारदर्शिता और स्वतंत्रता का होना आवश्यक है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महिला आरक्षण विधेयक क्या है?
महिला आरक्षण विधेयक महिलाओं को संसद और विधानसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है।
इस विधेयक का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें सशक्त बनाना है।
महिला आरक्षण का समर्थन कौन कर रहा है?
सामाजिक कार्यकर्ता जैसे मनीषा राजावत और वंदना व्यास जैसे लोग इसका समर्थन कर रहे हैं।
क्या केवल आरक्षण देने से महिलाएं सशक्त होंगी?
नहीं, आरक्षण के साथ-साथ महिलाओं को स्वतंत्रता और सशक्तिकरण की आवश्यकता है।
क्या आरक्षण का कोई नकारात्मक प्रभाव हो सकता है?
आरक्षण लागू करने में पारदर्शिता की कमी और बाहरी हस्तक्षेप नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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