महिला आरक्षण विधेयक पर पीएम मोदी का संदेश: मातृशक्ति का योगदान आवश्यक
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण विधेयक का उद्देश्य महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना है।
- प्रधानमंत्री मोदी का कहना है कि मातृशक्ति का योगदान आवश्यक है।
- सभी राजनीतिक दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया है।
- यह विधेयक 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद में इसका मतदान होगा।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर देश के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए हमारी मातृशक्ति को उनके पूर्ण सामर्थ के साथ राष्ट्र के विकास में शामिल करना आवश्यक है।
वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने माताओं, बहनों और बेटियों से संवाद करते हुए कहा, "भारत ने तय किया है कि 2047 में जब हमारी आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, तब तक हमें 'विकसित भारत' बनाना है। कई वर्षों के राजनीतिक अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि मातृशक्ति का योगदान आवश्यक है।"
उन्होंने कहा, "हाल ही में हमने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया, जिसमें सभी राजनीतिक दलों ने सहमति दी। यह आवश्यक है कि 2029 में होने वाले लोकसभा चुनावों में हमारी नारी शक्ति को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले।"
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से सभी राजनीतिक दलों से बातचीत चल रही है, और उन्होंने कहा, "अधिकतर दलों ने समर्थन किया है, जिससे एक सकारात्मक माहौल बना है।"
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील की कि इस लेख को पढ़ें और दूसरों को प्रेरित करें, ताकि सभी मिलकर 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद में इस विधेयक को पारित कराएं।
उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, "महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण समय की आवश्यकता है। इससे हमारा लोकतंत्र और अधिक जीवंत बनेगा।"