महिला आरक्षण विधेयक: संसद में महिलाओं की आवाज को मजबूती देने की दिशा में एक कदम
सारांश
मुख्य बातें
गजपति, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। सरकारी वकील राजेश कुमार पात्रो ने महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में कहा कि यह एक महान पहल है। देश में लगातार प्रगति हो रही है। महिलाओं को केवल रसोई के चार दीवारों में सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें आगे आकर उत्कृष्टता दिखानी चाहिए।
उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में भी महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण था। राइट टू इक्वलिटी का विचार चारों ओर फैल रहा है। इस विधेयक के पारित होने से संसद में महिलाओं की आवाज स्पष्ट रूप से सुनाई देगी। महिलाओं के लिए संसद और विधानसभा में आरक्षण का होना सही है। महिलाओं को 33 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए।
प्रोफेसर भारती पाणिग्राही ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र को मजबूत करने और शासन में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करने का सही समय है। उन्होंने कहा कि अगर राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी तो निश्चित रूप से एक सकारात्मक परिवर्तन आएगा, क्योंकि एक महिला ही दूसरी महिला की मानसिकता को समझ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की काबिलियत को पहचानने की आवश्यकता है। पीएम मोदी इस तथ्य को अच्छी तरह से समझते हैं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो देश में महिला सशक्तिकरण को एक नई दिशा मिलेगी। हमें सभी को पीएम मोदी पर विश्वास है। अगर यह विधेयक पारित हुआ तो यह नया इतिहास रचेगा। सुषमा स्वराज और निर्मला सीतारमण जैसी महिलाओं ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया है। ऐसी अन्य महिलाओं को भी यह अवसर मिलना चाहिए।
पद्म पुरस्कार से सम्मानित शशि सोनी और भीमाव्वा डोड्डाबलाप्पा शिल्लेक्याथारा ने महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि यह कानून, जो लंबे समय से लंबित था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताकत और प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने देश भर की महिलाओं से राष्ट्र निर्माण में बड़ी भूमिका निभाने का आह्वान किया।