महिलाओं को संसद में अवसर मिले, परिवारों के लिए नहीं: तहसीन पूनावाला
सारांश
Key Takeaways
- महिला आरक्षण बिल का समर्थन, लेकिन परिवार के सदस्यों के लिए नहीं।
- संसद में आम महिलाओं की भागीदारी की आवश्यकता।
- सरकार को बिल का ड्राफ्ट जनता के सामने रखना चाहिए।
- सांसदों की उपस्थिति कम से कम 80%25 होनी चाहिए।
- संसद को प्रभावी ढंग से चलाने की आवश्यकता।
पुणे, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला ने महिला आरक्षण बिल के संदर्भ में संसद का विशेष सत्र बुलाने की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस बिल से आम महिलाओं को संसद में भागीदारी बढ़ाने का अवसर मिलना चाहिए, फैमिली क्लब का निर्माण नहीं होना चाहिए।
पुणे में राष्ट्र प्रेस के साथ बातचीत में, तहसीन पूनावाला ने स्पष्ट किया कि हम महिला आरक्षण के समर्थन में हैं। देश की जनता चाहती है कि अधिक से अधिक महिलाएं संसद में आएं, लेकिन वे सच्ची आम महिलाएं होनी चाहिए, जो वास्तव में योगदान दें, न कि केवल अपने पति या पिता के पद के कारण सदन में सदस्य बनें।
उन्होंने यह भी कहा कि जिस आरक्षण बिल को सरकार लाना चाहती है, उसके पक्ष में भारत के अधिकांश लोग नहीं हैं, जिसके लिए संविधान में संशोधन करना होगा।
पूनावाला ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में सरकार ने संविधान में संशोधन किया था, लेकिन जनता को यह नहीं बताया गया कि वे क्या करने जा रहे हैं। इसके बाद, सरकार ने कहा कि वे महिलाओं के लिए आरक्षण लाना चाहते हैं। उस समय विपक्ष ने चेतावनी दी थी कि यह सही दिशा में नहीं जा रहा है, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी।
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह बिल वास्तव में महिलाओं के हित में है, तो इसका ड्राफ्ट देश की जनता के सामने क्यों नहीं रखा जा रहा है, ताकि इस पर खुली चर्चा हो सके और लोग अपनी राय दे सकें।
तहसीन पूनावाला ने कहा कि हमें ऐसे सांसद नहीं चाहिए जो केवल परिवार के कारण राजनीति में आएं, जैसे कि पति को टिकट न मिलने पर पत्नी को दिया जाए।
उन्होंने कहा कि हमें आम महिलाओं की आवश्यकता है, जो देश की आवाज उठाएं और कुछ योगदान दें, न कि केवल परिवार के कारण टिकट मिलने वाली महिलाओं को।
लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर उन्होंने कहा कि यदि सरकार लोकसभा की संख्या बढ़ाने जा रही है, तो यह सुनिश्चित करना होगा कि संसद ठीक से चलेगी। सांसदों को सवाल पूछने का अधिकार दिया जाना चाहिए।
पूनावाला ने कहा कि सांसदों की उपस्थिति कम से कम 80 प्रतिशत अनिवार्य होनी चाहिए। हर सांसद को अपने क्षेत्र से कम से कम 10 सवाल उठाने चाहिए। यदि कोई सांसद दो सत्रों में 10 सवाल नहीं उठाता है या उसकी उपस्थिति 80 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसकी सदस्यता रद्द की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हम करोड़ों रुपये संसद पर खर्च कर रहे हैं। हमें फैमिली क्लब नहीं बनाना है, बल्कि संसद को प्रभावी ढंग से चलाना है।