30 जुलाई 2026
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क्या मौलाना महमूद मदनी कानून हाथ में लेने की बात कर रहे हैं?

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क्या मौलाना महमूद मदनी कानून हाथ में लेने की बात कर रहे हैं?

सारांश

महामूद मदनी के विवादास्पद बयान पर भाजपा और जदयू नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। क्या मौलाना महमूद मदनी ने कानून को अपने हाथ में लेने की बात की? जानें इस विवाद के पीछे की सच्चाई।

मुख्य बातें

मौलाना महमूद मदनी के बयान ने राजनीतिक विवाद खड़ा किया है।
भाजपा और जदयू ने कानून के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।
विपक्ष की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई।
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का महत्व।

पटना, 30 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के नेताओं ने रविवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के 'जिहाद' संबंधी बयान की कड़ी निंदा की। भाजपा के प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने महमूद मदनी को देश के कानून और संविधान की याद दिलाई है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "देश में लोकतंत्र और न्यायतंत्र है। उन्हें (महमूद मदनी) को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे संविधान और कानून से ऊपर नहीं हैं।"

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि देश में बाबा साहेब अंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान है, जिसकी प्रस्तावना और सोच महत्वपूर्ण हैं। इसलिए कानून को अपने हाथ में लेने की कल्पना भी न करें। इसे बिल्कुल भी न सोचें।

जदयू के एमएलसी गुलाम गौस ने मौलाना महमूद मदनी के बयान को 'बेतुका' बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें (मदनी) गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। 'अनेकता में एकता' हमारे देश की विशेषता है।

गुलाम गौस ने महमूद मदनी के उस बयान को नकारा, जिसमें मौलाना ने कहा था कि 'घर वापसी' के नाम पर एक वर्ग को छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा, "यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से किसी धर्म को अपनाना चाहता है, तो उसे कौन रोक सकता है?"

जिहाद का अर्थ है कि अपने मन में किसी के प्रति या अपनी गलत इच्छाओं पर नियंत्रण पाना आवश्यक है। लेकिन उन्हें गैरजिम्मेदाराना बयान नहीं देना चाहिए।"

इस दौरान जदयू एमएलसी ने तेजस्वी यादव को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "विपक्ष का कोई अस्तित्व नहीं रह गया है। यह नियुक्ति लोकतंत्र की प्रक्रिया के कारण हुई है। विपक्ष का काम केवल सरकार की आलोचना करना नहीं है, बल्कि सरकार को सुझाव देना और गलतियों के बारे में जानकारी देना भी है।"

गुलाम गौस ने जोर देते हुए कहा कि विपक्ष का काम केवल विरोध करना नहीं है, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष भी सरकार का एक अंग होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के बयानों से समाज में तनाव और विभाजन बढ़ सकता है। हमें एकता और सहिष्णुता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, न कि किसी के व्यक्तिगत बयान को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना चाहिए।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महामूद मदनी ने कौन सा विवादास्पद बयान दिया?
मौलाना महमूद मदनी ने 'जिहाद' के संदर्भ में कुछ टिप्पणियाँ की थीं, जिन्हें भाजपा और जदयू नेताओं ने गंभीरता से लिया।
भाजपा और जदयू का इस पर क्या रुख है?
भाजपा और जदयू के नेताओं ने मदनी के बयानों की आलोचना की है और कानून को अपने हाथ में लेने की नसीहत दी है।
राष्ट्र प्रेस
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