क्या मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग विशेष पुण्य दिलाएगा?

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क्या मकर संक्रांति पर षटतिला एकादशी का दुर्लभ संयोग विशेष पुण्य दिलाएगा?

सारांश

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का अद्वितीय संयोग हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन तिल दान का विशेष महत्व है, जो पापों का नाश और मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। जानिए कैसे इस दिन के कार्यों से आपको विशेष पुण्य प्राप्त होगा।

Key Takeaways

  • मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का संयोग धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
  • तिल दान से पापों का नाश होता है।
  • उत्तरायण में किए गए दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
  • षटतिला एकादशी पर तिल के छह प्रकार से उपयोग की परंपरा है।
  • इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है, क्योंकि इस दिन षटतिला एकादशी भी मनाई जा रही है। इन दोनों का मिलन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है।

मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य मकर राशि में जाते हैं, जिससे उत्तरायण का आरंभ होता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है। संक्रांति पर अन्न दान के साथ-साथ अन्य पुण्य कर्म करने का भी महत्व है, और गुड़-तिल से बने खाद्य पदार्थों का सेवन और दान करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, सूर्य देव को जल अर्पित करने का भी एक विशेष पर्व होता है।

इस वर्ष मकर संक्रांति के साथ-साथ माघ मास की कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी भी आ रही है, जो भगवान विष्णु को समर्पित होती है। 'षटतिला' का अर्थ है छह प्रकार से तिल का उपयोग। तिल को पवित्र और शुभ फल देने वाला माना गया है। इस एकादशी पर तिल से जुड़े कार्य करने से पापों का नाश होता है, गरीबी दूर होती है, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

उत्तरायण काल में किए गए दान, व्रत और भक्ति का फल कई गुना अधिक होता है। इसलिए इस संयोग में तिल दान का महत्व और भी बढ़ जाता है। षटतिला एकादशी पर तिल का छह प्रकार से उपयोग करने की परंपरा है। जिसमें शामिल हैं: तिल मिले हुए पानी से स्नान करना, शरीर पर तिल का लेप लगाना, हवन में तिल की आहुति देना, ब्राह्मण या जरूरतमंदों को तिल दान करना, व्रत के नियमों के अनुसार तिल से बने व्यंजन खाना और तिल मिश्रित जल पीना या पितरों को तर्पण करना। ये सभी कार्य करने से व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।

दृक पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी को एकादशी तिथि शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। इसके बाद द्वादशी तिथि आरंभ होगी। बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई नया शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए। अनुराधा नक्षत्र 15 जनवरी सुबह 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। इस दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में संचार करेंगे।

सूर्योदय 7 बजकर 15 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगा।

Point of View

बल्कि यह सामाजिक एकता और भारतीय संस्कृति की गहराई को भी दर्शाता है। हमें इस अवसर का लाभ उठाना चाहिए।
NationPress
13/01/2026

Frequently Asked Questions

मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी का महत्व क्या है?
यह दिन सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश का प्रतीक है और षटतिला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है।
तिल दान से क्या लाभ होता है?
तिल दान करने से पापों का नाश, गरीबी का निवारण और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
षटतिला एकादशी पर क्या विशेष कार्य करने चाहिए?
तिल मिले हुए पानी से स्नान, तिल का लेप, हवन में तिल की आहुति, और ब्राह्मण को तिल दान करना चाहिए।
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