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क्या कुत्तों के काटने पर मुआवजा देना होगा? डॉग लवर्स की जिम्मेदारी होगी तय: सुप्रीम कोर्ट

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क्या कुत्तों के काटने पर मुआवजा देना होगा? डॉग लवर्स की जिम्मेदारी होगी तय: सुप्रीम कोर्ट

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के काटने पर मुआवजे के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अदालत ने डॉग लवर्स की जिम्मेदारी तय की है, जिससे यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गया है। जानें इस निर्णय का क्या प्रभाव पड़ेगा।

मुख्य बातें

कुत्तों के काटने पर मुआवजा दिया जाएगा।
डॉग लवर्स की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों पर मुआवजा तय करने का आदेश दिया।
आवारा कुत्तों के लिए नसबंदी एक प्रभावी उपाय है।
कोर्ट ने पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कुत्तों के काटने से होने वाली मौत या चोट के लिए मुआवजा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, डॉग लवर्स की जिम्मेदारी भी निर्धारित की जाएगी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां की। अदालत ने कहा कि कुत्तों के काटने पर होने वाली मौत या चोट के लिए राज्य सरकारों को मुआवजा देना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों को खुली जगह पर खाना देने वाले लोगों के व्यवहार पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि क्या उनके जज्बात केवल कुत्तों के प्रति हैं, इंसानों के प्रति नहीं? कोर्ट ने यह भी पूछा कि अगर किसी आवारा कुत्ते के हमले में एक नौ साल के बच्चे की जान चली जाती है, तो इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए?

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों में पाए जाने वाले वायरस का उल्लेख करते हुए कहा, "जब बाघ आवारा कुत्तों पर हमला करते हैं, तो उन्हें डिस्टेंपर की बीमारी हो जाती है और अंततः उनकी मौत हो जाती है।"

सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने तर्क दिया कि इस मामले को कुत्तों बनाम इंसान के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि इसे जानवर बनाम इंसान के परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए। पिछले वर्ष सांप के काटने से 50 हजार लोगों की जान गई थी, और बंदरों के काटने के मामले भी सामने आते हैं। चूहों को नियंत्रित करने के लिए कुत्तों की भी आवश्यकता है। इसलिए हमें पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित करना होगा।

मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि आवारा कुत्तों को मारने से उनकी संख्या कम नहीं होगी, और केवल नसबंदी ही एक प्रभावी समाधान है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नियामक ने सही तरीके से कार्य किया होता, तो हम आज इस स्थिति का सामना नहीं कर रहे होते।

कोर्ट ने कठोर टिप्पणियों के साथ कहा कि यह सुनवाई कोर्ट की प्रक्रिया के बजाय एक सार्वजनिक मंच बन गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हर कुत्ते के काटने और हर मौत पर हम राज्यों पर आवश्यक इंतजाम न करने के लिए भारी मुआवजा तय करेंगे। कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर भी जिम्मेदारी तय की जाएगी। क्या उन्हें अपने घर में नहीं रखना चाहिए? उन्हें घूमने, काटने और पीछा करने की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए? कुत्ते के काटने का असर जीवन भर रहता है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दर्शाते हैं कि हमें मानवता और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे समाज को गंभीरता से लेना चाहिए।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कुत्तों के काटने पर सभी मामलों में मुआवजा मिलेगा?
जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हर कुत्ते के काटने और मौत के मामलों में मुआवजा दिया जाएगा।
डॉग लवर्स की जिम्मेदारी क्या होगी?
डॉग लवर्स को आवारा कुत्तों की देखभाल और उनके सुरक्षित रखरखाव की जिम्मेदारी उठानी होगी।
क्या नसबंदी आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान है?
विशेषज्ञों का मानना है कि नसबंदी एक प्रभावी समाधान है, जो आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित कर सकता है।
क्या कुत्तों को खुली जगह पर खाना देना सही है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सवाल उठाया है और कहा है कि यह इंसानों के लिए खतरा बन सकता है।
इस मामले में नियमों का पालन कैसे होगा?
राज्य सरकारों को इस संबंध में आवश्यक इंतजाम करने होंगे, ताकि मुआवजा सुनिश्चित किया जा सके।
राष्ट्र प्रेस
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