जॉर्ज सोरोस पर भारत-विरोधी प्रदर्शनों की फंडिंग का आरोप, अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने वीडियो संदेश में लगाया इल्ज़ाम
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने 16 अक्टूबर 2026 को एक वीडियो संदेश जारी कर भारत में चल रहे प्रदर्शनों की फंडिंग के लिए अरबपति कारोबारी जॉर्ज सोरोस को कथित तौर पर जिम्मेदार ठहराया। यह संदेश उन्होंने सीधे भारत के युवाओं को संबोधित करते हुए जारी किया और इसमें उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की भी तीखी आलोचना की।
मिलबेन का आरोप: सोरोस का नेटवर्क है जिम्मेदार
मिलबेन ने अपने वीडियो में कहा कि उनसे बार-बार यह पूछा जा रहा था कि भारत में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे फंडिंग का स्रोत कौन है। इसके जवाब में उन्होंने कहा, 'वही व्यक्ति या वही समूह, जो दुनिया भर में ऐसे कई प्रदर्शनों को फंड करता है, खासकर तब जब किसी देश में कोई रूढ़िवादी (कंजर्वेटिव) नेता सत्ता में हो। उसका नाम जॉर्ज सोरोस है। उनके नेटवर्क से जुड़े लोग दुनिया के कई हिस्सों में विरोध-प्रदर्शनों और अशांति को फंड करते रहे हैं।'
उन्होंने यह भी दावा किया कि यह कोई छिपी हुई बात नहीं है। मिलबेन के अनुसार, दिपके ने सोशल मीडिया पर स्वयं कहा था कि उन्हें सोरोस से आर्थिक मदद मिलती है। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया।
बुधवार की एक्स पोस्ट से आगे का कदम
यह वीडियो बयान उनकी बुधवार को की गई एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट से एक कदम आगे माना जा रहा है। उस पोस्ट में उन्होंने कहा था कि सीजेपी को अमेरिका के कुछ चुनिंदा दानदाताओं से फंडिंग मिल रही है, लेकिन तब उन्होंने किसी व्यक्ति या संस्था का नाम नहीं लिया था। इस बार उन्होंने सीधे नाम लेते हुए आरोप दोहराए।
दिपके और राहुल गांधी पर निशाना
अभिजीत दिपके को सीधे संबोधित करते हुए मिलबेन ने कहा, 'दिपके, मैं आपसे सीधे बात कर रही हूं। आपके पास लोगों को जोड़ने और अपनी बात रखने की क्षमता है। अगर आप इस प्रतिभा का इस्तेमाल सकारात्मक कामों के लिए करें, तो भारत में एक प्रभावशाली ताकत बन सकते हैं।' उन्होंने दिपके को सलाह दी कि वे प्रधानमंत्री और देश के नेतृत्व से मिलकर अपने विचार रचनात्मक तरीके से रखें।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी जिक्र किया और कहा कि राहुल गांधी और दिपके ऐसा नेतृत्व नहीं दिखाते जो सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहता हो। उनके शब्दों में, 'राहुल गांधी और दिपके देश में एकता लाने के बजाय विरोध-प्रदर्शनों को आगे बढ़ा रहे हैं। वे किसी तरह का ठोस समाधान भी नहीं दे रहे हैं।'
अमेरिकी आंदोलनों से तुलना और मार्टिन लूथर किंग की मिसाल
मिलबेन ने कहा कि भारत में चल रहे ये प्रदर्शन उन्हें ठोस मुद्दों पर आधारित नहीं लगते। उन्होंने इन प्रदर्शनों की तुलना अमेरिका में हुए 'एंटीफा', 'ब्लैक लाइव्स मैटर' और कुछ ऐतिहासिक स्मारकों को हटाने के खिलाफ हुए आंदोलनों से की। इसके विपरीत उन्होंने मार्टिन लूथर किंग जूनियर की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके शांतिपूर्ण आंदोलन के कारण अमेरिका में नागरिक अधिकार कानून और मतदान अधिकार कानून जैसे बड़े बदलाव संभव हुए।
मोदी की तारीफ और विपक्षी आंदोलन पर टिप्पणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए मिलबेन ने उन्हें दुनिया के सबसे बेहतर नेताओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन, 12 वर्ष के प्रधानमंत्री कार्यकाल और लगातार तीन बार मिली जीत जनता के भरोसे का प्रमाण है। चुनाव में धांधली के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने दावा किया कि मौजूदा विपक्षी आंदोलन लंबे समय तक नहीं चलेगा और अगर कुछ होगा तो मोदी 2029 में फिर से चुने जाएंगे।
गौरतलब है कि मिलबेन के ये बयान किसी आधिकारिक जाँच या सरकारी रिपोर्ट पर आधारित नहीं हैं, बल्कि ये उनके व्यक्तिगत दावे हैं। सोरोस या दिपके की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।