भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट के लिए गलत सलाहकार जिम्मेदार: मैरी मिलबेन
सारांश
मुख्य बातें
अफ्रीकी-अमेरिकी गायिका और भारत-अमेरिका संबंधों की मुखर समर्थक मैरी मिलबेन ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों के बीच संबंध कमज़ोर पड़े हैं। उनके मुताबिक इसकी मुख्य वजह व्हाइट हाउस के भीतर गलत सलाहकारों का प्रभाव है, और नई दिल्ली के साथ भरोसा दोबारा कायम करने के लिए अमेरिकी नेतृत्व को ईमानदार और ठोस पहल करनी होगी।
रूबियो की भारत यात्रा: व्यक्तिगत रूप से अहम, नीतिगत असर सीमित
मिलबेन ने एक खास इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की हाल की भारत यात्रा उनके लिए निजी तौर पर महत्वपूर्ण रही, लेकिन द्विपक्षीय संबंधों में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मुझे नहीं लगता कि इस यात्रा से अमेरिका-भारत रिश्तों में कोई खास सुधार हुआ है। ट्रंप प्रशासन ने इस दिशा में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया है।"
हालांकि, उन्होंने रूबियो की यात्रा के दौरान भारत की मेहमाननवाज़ी और नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा, "रूबियो को भारत में देखना बहुत अच्छा लगा। यह शायद उनका भारत का पहला दौरा था।" रूबियो ने नई दिल्ली के अलावा कोलकाता, जयपुर और आगरा का भी दौरा किया, जिससे उन्हें भारत की संस्कृति और समाज को करीब से समझने का अवसर मिला।
दोनों कार्यकालों में फर्क: 'सही लोग' बनाम 'गलत लोग'
मिलबेन ने ट्रंप के पहले और दूसरे कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि पहले कार्यकाल में सलाहकार भारत और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के महत्व को बेहतर समझते थे। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के पास उस समय सही लोग थे जो उन्हें सलाह दे रहे थे कि भारत के साथ अच्छे रिश्ते बनाए रखना कितना ज़रूरी है।" उन्होंने टेक्सास में आयोजित प्रसिद्ध 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम का भी उल्लेख किया।
दूसरे कार्यकाल के बारे में उन्होंने कहा, "यह प्रशासन 2.0, सच कहूँ तो, इसमें सही लोग नहीं हैं।" उनके अनुसार भारत से जुड़ी टैरिफ नीति पर भी राष्ट्रपति को गलत सलाह दी गई।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय के प्रति भाषा पर आपत्ति
मिलबेन ने अप्रवासियों और भारतीय-अमेरिकी समुदाय को लेकर वर्तमान प्रशासन द्वारा इस्तेमाल की जा रही भाषा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, "मैं इस बात से बहुत निराश और परेशान हूँ कि इस प्रशासन ने भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बारे में इतने नकारात्मक तरीके से बात की है।" उनके मुताबिक रिश्ते सुधारने के लिए वॉशिंगटन को अधिक सम्मानजनक भाषा अपनानी होगी।
भारतीय नेतृत्व और राजदूत की सराहना
मिलबेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री बहुत ही शालीन और विनम्र थे। भारत का नेतृत्व बहुत ही अच्छा है।" उन्होंने भारत में अमेरिका के मौजूदा राजदूत सर्जियो गोर की भी तारीफ की और कहा कि जितनी जिम्मेदारी उन्हें दी गई है, उसके हिसाब से वे बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
आगे क्या: अगले चुनाव चक्र तक इंतजार?
जब उनसे पूछा गया कि दोनों देशों के रिश्ते कैसे सुधर सकते हैं, तो मिलबेन ने कहा, "मुझे लगता है कि इसे सुधारने में अगला चुनाव चक्र लग जाएगा, अगर मैं ईमानदारी से कहूँ।" उनके मुताबिक दुनिया भर के नेता, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी भी शामिल हैं, नवंबर में होने वाले अमेरिकी राजनीतिक बदलावों पर बारीकी से नज़र रखे हुए हैं।
भारत को 'अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक साझेदार' बताते हुए मिलबेन ने कहा कि नई दिल्ली के साथ भरोसा दोबारा बनाना अमेरिकी नेताओं की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले अमेरिकी नेतृत्व में विविधता और सीमा सुरक्षा दोनों को समान महत्व दिया जाएगा।