क्या माथे पर चांद और गले में मखाने की माला से बाबा महाकाल का शृंगार भक्तों को मोहित करता है?

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क्या माथे पर चांद और गले में मखाने की माला से बाबा महाकाल का शृंगार भक्तों को मोहित करता है?

सारांश

उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में नववर्ष के पहले रविवार को भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। महाकाल के अद्भुत शृंगार और भस्म आरती में भक्तों की श्रद्धा और उत्साह देखने लायक था। क्या आप भी इस दिव्य अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं?

Key Takeaways

  • बाबा महाकाल के दर्शन भक्तों के लिए एक दिव्य अनुभव है।
  • हर तिथि के अनुसार बाबा का शृंगार बदलता है।
  • भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

उज्जैन, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नववर्ष के पहले रविवार को उज्जैन स्थित बाबा महाकाल के मंदिर में भक्तों का एक बड़ा सैलाब उमड़ा। साल का पहला रविवार होने के कारण दूर-दूर से भक्त महाकाल के दर्शन के लिए आए।

देर रात से भस्म आरती में भाग लेने के लिए भक्तों को लंबी लाइनों में खड़ा देखा गया, और ठंडे मौसम ने भी भक्तों का उत्साह कम नहीं किया। बाबा महाकाल के अद्भुत दर्शन से भक्तों का मन श्रद्धा से भर गया और सभी के “हर-हर महादेव” के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

माघ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रविवार को बाबा का अद्भुत शृंगार किया गया, जिसे देखकर भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। पहले मंदिर के पुजारियों ने बाबा वीरभद्र से आज्ञा लेकर मंदिर के कपाट खोले और गर्भगृह में अन्य देवी-देवताओं की पूजा की, जिसके बाद बाबा पर घी, जल, दूध, दही और रस से जलाभिषेक किया गया। बाबा के माथे पर बेलपत्र और चांदी का चांद भी लगाया गया, जिससे बाबा के दिव्य स्वरूप की अनुभूति हुई।

शृंगार पूरा होने के बाद भस्म आरती का आयोजन हुआ और भस्म से बाबा को नहलाया गया। ऐसा माना जाता है कि भस्म आरती के दौरान बाबा निराकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, लेकिन पूर्ण शृंगार कर वे साकार रूप में भक्तों के कष्टों को दूर करते हैं।

आज बाबा महाकाल कमल और मखाने की माला से भी सजे थे, फिर भस्म रमाकर आलोकिक श्रंगार में दर्शन दिए, जिससे पूरा मंदिर परिसर जय श्री महाकाल की गूंज से गूंज उठा। बता दें कि हर दिन बाबा का शृंगार अलग तरीके से किया जाता है। हर तिथि और शुभ दिन के अनुसार बाबा नए रूपों में भक्तों को दर्शन देते हैं, और यही कारण है कि भस्म आरती में सबसे अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं। बाबा की सेवा में सुबह से लेकर शाम तक 6 आरतियां होती हैं, जो अपने आप में अनोखी होती हैं।

पिछले दिन बाबा का चांद और सूर्य के साथ राजा स्वरूप अद्भुत शृंगार किया गया था, जो बहुत ही अलौकिक था।

Point of View

नववर्ष के पहले रविवार को लोग दूर-दूर से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। यह एक सांस्कृतिक परंपरा है जो भारतीय समाज की आध्यात्मिकता को दर्शाती है।
NationPress
05/01/2026

Frequently Asked Questions

बाबा महाकाल का शृंगार कैसे किया जाता है?
बाबा महाकाल का शृंगार विभिन्न सामग्री जैसे घी, जल, दूध, दही, और रस से किया जाता है।
भस्म आरती का महत्व क्या है?
भस्म आरती का महत्व भक्तों को बाबा के निराकार रूप में दर्शन देने में है।
क्या हर दिन बाबा का शृंगार अलग होता है?
जी हां, हर दिन बाबा का शृंगार अलग तरीके से किया जाता है।
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