दशहरे पर बिहार शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी की युवाओं से अपील — बुराई और नशे का करें दहन, AI में बनाएं विशेषज्ञता
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने 20 अक्टूबर 2026 को दशहरे के अवसर पर भागलपुर में युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने भीतर की बुराइयों और नशे की लत का रावण-दहन की भाँति अंत करें। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को जीवन में उतारने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा रोबोटिक साइंस में विशेषज्ञता हासिल करने पर बल दिया, ताकि बिहार एक बार फिर ज्ञान और नवाचार की धरती के रूप में विश्व को दिशा दे सके।
रावण दहन — हर बुराई के अंत का प्रतीक
मंत्री तिवारी ने कहा कि दशहरे पर रावण दहन महज एक परंपरा नहीं, बल्कि हर अधर्म और बुराई के समापन का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने युवाओं से कहा, 'रावण दहन जब हम करते हैं तो हर बुराई का दहन करते हैं, हर अधर्म का दहन करते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि दशहरा युवाओं के लिए अपनी कमज़ोरियों का त्याग कर श्रेष्ठता को जाग्रत करने का सुअवसर है।
तिवारी ने युवाओं से अपने भीतर के स्वामी विवेकानंद को जगाने और समाज में व्याप्त नशे की प्रवृत्ति को समूल नष्ट करने का संकल्प लेने को कहा। उनके अनुसार, 'युवाओं का जीवन देश के लिए अमूल्य धरोहर है।'
AI और तकनीकी दौर में मानव संसाधन की भूमिका
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर मोहन भागवत के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि AI और रोबोटिक साइंस तकनीकी क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण शोध हैं। इन तकनीकों से अनेक कार्य सुगम हो सकते हैं, लेकिन इनका विकास और संचालन अंततः मनुष्य ही करता है।
तिवारी ने स्पष्ट किया कि 'तकनीक कितनी भी आगे बढ़ जाए, उसे विकसित करने वाले व्यक्ति का सही और सक्षम होना ज़रूरी है।' उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने गुणों और क्षमताओं को तकनीक में समाहित करता है, इसलिए तकनीकी प्रगति के साथ-साथ मानव संसाधन को भी सक्षम बनाना अनिवार्य है।
युवाओं के लिए AI में विशेषज्ञता की ज़रूरत
मंत्री ने इस बात पर विशेष ज़ोर दिया कि आज के युवाओं को केवल तकनीक का उपयोगकर्ता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसमें गहरी विशेषज्ञता अर्जित करनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में AI शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल करने की माँग तेज़ हो रही है।
गौरतलब है कि बिहार सरकार ने हाल के वर्षों में स्कूली शिक्षा के डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया है। इस संदर्भ में शिक्षा मंत्री का यह बयान राज्य की तकनीकी शिक्षा नीति की दिशा का संकेत देता है।
बिहार — ज्ञान की धरती, भविष्य का मार्गदर्शक
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि बिहार सदैव से ज्ञान की भूमि रही है — नालंदा और विक्रमशिला जैसे महाविहारों की यह धरती अपनी ऐतिहासिक पहचान को पुनः स्थापित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि युवा सही दिशा में आगे बढ़ें, तो बिहार भविष्य में विश्व को मार्गदर्शन देने की भूमिका निभाएगा।
आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार इस दृष्टि को नीतिगत ढाँचे में कैसे ढालती है और AI-शिक्षा के लिए किस तरह की संस्थागत संरचना तैयार की जाती है।