दशहरे पर शिवराज सिंह चौहान का आह्वान: नशा और बेटियों से दुराचार रूपी रावण को जलाएं
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नशा नाश की जड़ है और इस पावन पर्व पर हमें नशा रूपी रावण का अंत करना चाहिए। उन्होंने साथ ही महिलाओं के सम्मान और बेटियों के साथ होने वाले दुराचार जैसी सामाजिक बुराइयों को भी आधुनिक 'रावण प्रवृत्ति' बताया।
विजयादशमी संदेश का सार
चौहान ने अपने विजयादशमी संदेश में कहा कि यह पर्व केवल पुतला जलाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उनके शब्दों में, 'बुराई ही रावण है और अच्छाई भगवान राम हैं।' उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया कि वे सन्मार्ग पर चलते हुए समाज में व्याप्त वास्तविक बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लें।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि रावण के पुतले हर वर्ष जलते हैं, फिर भी प्रश्न यह है कि क्या बुराइयाँ पूरी तरह जल पाती हैं। उनके अनुसार जब तक समाज में दुराचार और नशे की लत जैसी बुराइयाँ जड़ जमाए हैं, तब तक विजयादशमी की वास्तविक भावना पूर्ण नहीं होती।
नशे को बताया बाहरी षड्यंत्र
चौहान ने नशे की समस्या को केवल सामाजिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी बताया। उन्होंने कहा कि देश के बाहर की ताकतें भारतीय युवाओं को कमज़ोर करने के लिए विभिन्न प्रकार के नशे भेजने की कोशिश करती हैं। उनके अनुसार यह 'नशे की प्रवृत्ति' ही आज का असली रावण है जिसे मारना ज़रूरी है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में नशाखोरी की बढ़ती समस्या को लेकर सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर चिंता जताई जा रही है। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में नशे से जुड़ी घटनाएं लगातार समाचारों में बनी रहती हैं।
बेटियों के सम्मान पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि बेटियों के साथ दुराचार की घटनाएं उनकी अंतरात्मा को व्यथित करती हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की 'रावण प्रवृत्ति' को समाप्त करना ही वास्तविक दशहरा मनाना है।
चौहान ने देशवासियों से आह्वान किया कि वे माँ, बहन और बेटी का सम्मान करें और नशे से दूर रहें। उनके अनुसार इन दो संकल्पों — महिला सम्मान और नशामुक्ति — को अपनाकर ही विजयादशमी पर्व की मूल भावना सार्थक होगी।
नवरात्रि से विजयादशमी तक का संदर्भ
चौहान ने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि नवरात्रि का पर्व अभी समाप्त हुआ है, जिसमें माँ की साधना की जाती है। उन्होंने कामना की कि माँ की कृपा और आशीर्वाद सभी देशवासियों पर बना रहे और वे सुख-समृद्धि के साथ देश को आगे बढ़ाने में योगदान दें।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इस पर्व पर दिए गए संदेशों को नीतिगत पहलों में किस प्रकार परिवर्तित किया जाता है, विशेषकर नशामुक्ति और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में।