क्या तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में एमके स्टालिन को मिलेगी करारी हार?
सारांश
Key Takeaways
- एमके स्टालिन का हिंदी पर बयान विवादित है।
- भाजपा सांसद दिनेश शर्मा का पलटवार महत्वपूर्ण है।
- तमिलनाडु में चुनाव के नतीजे अहम हो सकते हैं।
- हिंदी और तमिल के बीच का संबंध समझना जरूरी है।
- राजनीति में बयानों का गहरा असर होता है।
लखनऊ, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के हिंदी भाषा पर दिए गए बयान पर भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ये बाप-बेटे उस बुझते हुए दीये की तरह हैं, जो बुझने से ठीक पहले तेजी से फड़फड़ाते हैं। अब ये समाप्त होने वाले हैं। तमिलनाडु में उन्हें एक करारी हार का सामना करना पड़ेगा, इसलिए वे ऐसे बयान देकर लोगों को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।
लखनऊ में राष्ट्र प्रेस से बातचीत में दिनेश शर्मा ने कहा कि स्टालिन बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए हिंदी को हथियार बना रहे हैं, जबकि हिंदी किसी सीमा में बंधी नहीं है। हिंदी, तमिल की बड़ी बहन के समान है और दोनों के बीच प्रेम है। जब उत्तर प्रदेश में तमिल संगम हो सकता है, तो वहां हिंदी का विरोध करने का क्या औचित्य है?
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में हमारी सरकार ने तमिल पाठ्यक्रम को पढ़ाने का विषय रखा है।
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन के लोगों ने भी इसकी सराहना की है। भारत में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर पूरी दुनिया ने इसे मान लिया है। यह एक सफल ऑपरेशन था और हमारे पड़ोसी के लिए एक सबक भी था। अगर तुम आतंकवादी सोच रखोगे, तो घर में घुसकर मारा जाएगा।
दिनेश शर्मा ने गणतंत्र दिवस का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया मान रही है कि भारत अब वो भारत नहीं रहा जो 26 जनवरी और 15 अगस्त को शांति का प्रतीक कबूतर उड़ाएगा और पाकिस्तान पर गोली चलाएगा। अब गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा, बम का जवाब बम से दिया जाएगा।
विभिन्न धर्मों के पवित्र स्थलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लिए कुछ धार्मिक मान्यताएं भिन्न होती हैं, जिसमें दूसरे धर्म का भी सम्मान किया जाता है। अब, अगर वेटिकन सिटी में गैर-ईसाई जाएं, तो उन्हें बराबरी नहीं मिलती। यह ईसाई धर्म का केंद्र है। उसी तरह, मक्का और मदीना मुस्लिम भाइयों के लिए पवित्र स्थान हैं। गैर-मुस्लिम वहां नहीं जा सकते। हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर भी मुस्लिमों की संख्या बहुत कम होती है।
योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता पर विपक्ष के तंज पर दिनेश शर्मा ने कहा कि हर कोई अपनी पार्टी की सराहना करता है और दूसरों की आलोचना करता है, यह उनका अधिकार है। भाजपा योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। योगी भारत के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। उत्तर प्रदेश में उनके जैसा कोई नहीं है। किसी भी विपक्षी नेता की लोकप्रियता उनके मुकाबले आधी भी नहीं है। इसलिए लोग उनकी आलोचना करते हैं। भाजपा काम करती है और जनता उन्हें चुनती है।