क्या मनरेगा की बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया?

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क्या मनरेगा की बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा: मुख्यमंत्री सिद्धारमैया?

सारांश

कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस का आंदोलन केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ है। क्या मनरेगा की बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा? जानें इस महत्वपूर्ण विषय पर।

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का आंदोलन जनहित के लिए है।
  • मनरेगा की बहाली की मांग की जा रही है।
  • कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध कर रही है।
  • महिलाएं और दलित इस योजना से लाभान्वित हो रहे थे।
  • केंद्र सरकार का नया कानून राज्यों पर बोझ डाल रहा है।

बेंगलुरु, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, एआईसीसी महासचिव और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को राज्यपाल थावर चंद गहलोत से मुलाकात की और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की पुनर्बहाली की मांग करते हुए एक ज्ञापन प्रस्तुत किया।

पार्टी विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम जी) के अधिनियमन का विरोध कर रही है।

इससे पहले, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) ने बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित 'मनरेगा बचाओ संग्राम' के तहत एक विशाल विरोध प्रदर्शन और 'राजभवन चलो' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रही है और यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक वीबी-जी राम जी योजना वापस नहीं ली जाती और मनरेगा को पूरी तरह से बहाल नहीं किया जाता।

सिद्धारमैया ने कहा कि भाजपा ने हाल ही में दुर्भावनापूर्ण इरादे से मनरेगा को रद्द कर दिया और उसकी जगह वीबी-जी राम जी योजना लागू कर दी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा अधिनियम 2005 में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते लागू किया गया था।

उन्होंने कहा कि भोजन का अधिकार, काम का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, सूचना का अधिकार और वन अधिकार अधिनियम, ये सभी जनहितैषी कानून कांग्रेस सरकारों के दौरान लाए गए थे। कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों, अल्पसंख्यकों और छोटे किसानों का ध्यान रखा है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा इन जनहितैषी योजनाओं को नष्ट कर रही है और ग्रामीण आबादी को रोजगार से वंचित कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा के लगभग 53 प्रतिशत श्रमिक महिलाएं थीं, 28 प्रतिशत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से थे, और लगभग पांच लाख दिव्यांगजन दिहाड़ी मजदूर के रूप में कार्यरत थे। मनरेगा ने सभी के लिए रोजगार सुनिश्चित किया।

सिद्धारमैया ने कहा कि मनरेगा के तहत महिलाएं, दलित, पिछड़े वर्ग, अल्पसंख्यक और छोटे किसान साल के किसी भी दिन काम मांग सकते थे। पहले ग्राम सभाएं और ग्राम पंचायतें काम का स्वरूप तय करती थीं। अब स्थानीय ग्रामीण निकायों के बजाय दिल्ली में ग्रामीण गरीबों के काम का फैसला किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सभी ग्राम पंचायतें दिहाड़ी मजदूरों को रोजगार के अवसर प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। मनरेगा के तहत श्रमिकों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी। काम करने का अधिकार गरीबों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसे वीबी ग्राम जी के माध्यम से छीन लिया गया है। पहले, मनरेगा के तहत पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी। अब, अनुदान रोक दिया गया है, और नए कानून के तहत राज्यों को 40 प्रतिशत लागत वहन करनी होगी जबकि केंद्र केवल 60 प्रतिशत का योगदान देगा।

सिद्धारमैया ने कहा कि केंद्र की ऐसी जनविरोधी नीतियों के कारण कई राज्य पीड़ित हैं।

Point of View

NationPress
14/02/2026

Frequently Asked Questions

मनरेगा क्या है?
मनरेगा एक सरकारी योजना है जो ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार प्रदान करती है।
क्यों मनरेगा की बहाली की मांग की जा रही है?
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि मनरेगा को रद्द करना ग्रामीण रोजगार को प्रभावित करेगा।
वीबी-जी राम जी योजना क्या है?
यह योजना मनरेगा का विकल्प है, जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है।
कर्नाटक में इस आंदोलन का क्या असर हो सकता है?
इस आंदोलन से केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ सकता है और मनरेगा की बहाली हो सकती है।
किसने मनरेगा को लागू किया था?
मनरेगा को 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लागू किया गया था।
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