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मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ₹502 करोड़ की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति अंतरित करेंगे, 8.19 लाख छात्रों को लाभ

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मध्य प्रदेश: CM मोहन यादव ₹502 करोड़ की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति अंतरित करेंगे, 8.19 लाख छात्रों को लाभ

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने आरटीई के तहत ₹502 करोड़ की फीस प्रतिपूर्ति एक क्लिक में 20,456 निजी स्कूलों को अंतरित करने का कदम उठाया है। 2011 से अब तक ₹3,600 करोड़ से अधिक खर्च हो चुके हैं — यह हस्तांतरण राज्य की शिक्षा-समावेश प्रतिबद्धता का बड़ा संकेत है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री मोहन यादव नरसिंहपुर में ₹502 करोड़ की आरटीई फीस प्रतिपूर्ति सिंगल क्लिक से अंतरित करेंगे।
लाभ मिलेगा प्रदेश के 20,456 अशासकीय स्कूलों और 8 लाख 19 हजार से अधिक विद्यार्थियों को।
2011 से अब तक 16.85 लाख से अधिक छात्रों को ₹3,600 करोड़ की फीस प्रतिपूर्ति दी जा चुकी है।
₹45 करोड़ से अधिक लागत वाले शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय , नरसिंहपुर के नवीन भवन का लोकार्पण भी होगा।
विद्यालय में केजी-1 से कक्षा 12वीं तक डिजिटल क्लासरूम, विज्ञान लैब, पुस्तकालय और खेल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
सत्र 2025-26 में छात्रा माही साहू ने कक्षा 12वीं की मेरिट सूची में स्थान पाकर विद्यालय का मान बढ़ाया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव रविवार, 12 अक्टूबर 2025 को नरसिंहपुर जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2024-25 की फीस प्रतिपूर्ति राशि सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरित करेंगे। इस एकल हस्तांतरण से प्रदेश के 20,456 अशासकीय स्कूलों के खातों में ₹502 करोड़ की राशि पहुँचेगी, जिससे 8 लाख 19 हजार से अधिक छात्रों की नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित होगी।

मुख्य घटनाक्रम

नरसिंहपुर में होने वाले इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, स्थानीय जनप्रतिनिधि, बड़ी संख्या में विद्यार्थी और उनके अभिभावक उपस्थित रहेंगे। इसी अवसर पर मुख्यमंत्री ₹45 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय के नवीन भवन का लोकार्पण भी करेंगे। यह विद्यालय केजी-1 से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान करता है।

आरटीई योजना का व्यापक दायरा

आरटीई अधिनियम के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक के गरीब एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाती है, और उनकी फीस सीधे संबंधित स्कूलों को प्रतिपूर्त की जाती है। गौरतलब है कि वर्ष 2011 से अब तक इस योजना के अंतर्गत 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल चुका है और कुल ₹3,600 करोड़ की राशि का भुगतान किया जा चुका है। वर्तमान ₹502 करोड़ का हस्तांतरण इसी निरंतर श्रृंखला की अगली कड़ी है।

सांदीपनि विद्यालय: आधुनिक शिक्षा का नया केंद्र

नरसिंहपुर में निर्मित शासकीय सांदीपनि उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का नवीन भवन सांदीपनि विद्यालय योजना के प्रथम चरण में तैयार हुआ है। विद्यालय परिसर में डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल एवं ऑडिटोरियम जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। विद्यार्थियों की शारीरिक गतिविधियों एवं खेलकूद के लिए खेल मैदान तथा सुरक्षित आवागमन हेतु परिवहन सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

सकारात्मक परिणाम सामने आए

इस आधुनिक शैक्षणिक वातावरण के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इसी विद्यालय की मेधावी छात्रा कु. माही साहू ने कक्षा 12वीं की मेरिट सूची में स्थान प्राप्त कर विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

आम जनता पर असर

₹502 करोड़ की फीस प्रतिपूर्ति सीधे 20,456 निजी स्कूलों को मिलने से इन संस्थाओं की वित्तीय स्थिति स्थिर रहेगी और वे आरटीई सीटों पर नामांकित गरीब छात्रों को शिक्षा देना जारी रख सकेंगी। शिक्षाविदों के अनुसार समय पर फीस प्रतिपूर्ति न मिलने पर कुछ निजी स्कूल आरटीई सीटें भरने में अनिच्छा दिखाते हैं — इस बड़े एकमुश्त हस्तांतरण से वह बाधा दूर होने की उम्मीद है। आगे की राह में सरकार का लक्ष्य होगा कि सांदीपनि विद्यालय योजना को अन्य जिलों तक विस्तारित किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या निजी स्कूल आरटीई सीटें वास्तव में योग्य बच्चों से भर रहे हैं या केवल काग़ज़ पर। 2011 से अब तक ₹3,600 करोड़ खर्च होने के बावजूद आरटीई नामांकन की गुणवत्ता और ड्रॉपआउट दर की स्वतंत्र समीक्षा सार्वजनिक डोमेन में दुर्लभ है। सांदीपनि विद्यालय की एक छात्रा की मेरिट सूची में उपस्थिति उत्साहजनक है, पर यह एकल उदाहरण प्रणालीगत सुधार का प्रमाण नहीं। सरकार को फीस प्रतिपूर्ति के साथ-साथ नामांकित बच्चों के सीखने के स्तर का सार्वजनिक ऑडिट भी प्रस्तुत करना चाहिए।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश में आरटीई फीस प्रतिपूर्ति क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत मध्य प्रदेश सरकार निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 8वीं तक गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश दिलाती है और उनकी फीस सीधे संबंधित स्कूलों को देती है। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में ₹502 करोड़ की राशि 20,456 स्कूलों को मिलेगी, जिससे 8.19 लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित होंगे।
₹502 करोड़ की राशि कब और कैसे अंतरित की जाएगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव नरसिंहपुर जिले में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि एक साथ 20,456 अशासकीय स्कूलों के खातों में अंतरित करेंगे। यह तकनीकी प्रक्रिया डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की तर्ज पर की जा रही है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
2011 से अब तक आरटीई के तहत मध्य प्रदेश में कितना खर्च हुआ है?
वर्ष 2011 से लेकर अब तक मध्य प्रदेश सरकार आरटीई के तहत 16 लाख 85 हजार से अधिक विद्यार्थियों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में कुल ₹3,600 करोड़ से अधिक की राशि का भुगतान कर चुकी है। वर्तमान ₹502 करोड़ का हस्तांतरण इसी संचित प्रयास की नवीनतम कड़ी है।
शासकीय सांदीपनि उत्कृष्ट विद्यालय नरसिंहपुर में क्या-क्या सुविधाएँ हैं?
₹45 करोड़ से अधिक लागत से निर्मित इस विद्यालय में डिजिटल क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, अत्याधुनिक विज्ञान प्रयोगशाला, समृद्ध पुस्तकालय, मल्टीपर्पज हॉल, ऑडिटोरियम, खेल मैदान और परिवहन सुविधा उपलब्ध है। यह विद्यालय केजी-1 से कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए डिज़ाइन किया गया है।
सांदीपनि विद्यालय योजना से मध्य प्रदेश के शिक्षा क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
सांदीपनि विद्यालय योजना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। नरसिंहपुर इसके प्रथम चरण का केंद्र है और सत्र 2025-26 में छात्रा माही साहू का कक्षा 12वीं की मेरिट सूची में स्थान पाना इस योजना की प्रारंभिक सफलता का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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