क्या मोहला-मानपुर के वनांचल स्कूलों में सोलर प्लांट से बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिला?

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क्या मोहला-मानपुर के वनांचल स्कूलों में सोलर प्लांट से बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल मिला?

सारांश

छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में नक्सलवाद का अंत और विकास की नई दिशा में तेजी से बढ़ते कदम, विशेषतः शिक्षा के क्षेत्र में। देखिए कैसे सौर ऊर्जा ने बच्चों के भविष्य को रोशन किया।

Key Takeaways

  • वनांचल स्कूलों में सौर ऊर्जा का प्रयोग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है।
  • बिजली की सुविधा से बच्चों का पढ़ाई में मन लगने लगा है।
  • स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से विकास की नई कहानी लिखी जा रही है।

मोहला, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में दिखाई दे रहा है और इसके साथ-साथ विकास की गति भी तेज हो गई है। कभी नक्सल प्रभावित समझे जाने वाले इस जिले के वनांचल क्षेत्रों में अब बदलाव स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।

विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वर्षों तक अंधेरे में पढ़ाई करने को मजबूर बच्चों के जीवन में सौर ऊर्जा की रोशनी आई है, जिससे उनके भविष्य को एक नई दिशा मिली है।

जिले के अत्यधिक नक्सल प्रभावित वनांचल क्षेत्रों में विकास कार्य अब धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। चार शासकीय विद्यालयों को चिन्हित किया गया था, जहां आज तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंच पाई थी। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सीमित संसाधनों और अंधेरे कमरों में पढ़ाई करनी पड़ती थी। बरसात और ठंड के मौसम में स्थिति और भी कठिन हो जाती थी, जिससे पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ता था।

विकासखंड मानपुर के गट्टेपायली, संबलपुर कोराचा, बोदरा और गट्टेगहन स्थित चार विद्यालयों में यह पहल अब साकार हो गई है। शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) के समन्वय से इन सभी विद्यालयों में 1.2 किलोवॉट क्षमता के ऑफ-ग्रिड सोलर पावर प्लांट स्थापित किए गए हैं। सौर ऊर्जा संयंत्र लगते ही वर्षों से अंधेरे में डूबे स्कूल अब रोशनी से जगमगा उठे हैं और बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल रहा है।

मानपुर की कलेक्टर तुलिका प्रजापति ने मीडिया से बातचीत में बताया कि विकासखंड मानपुर के चार विद्यालयों गट्टेपायली, संबलपुर कोराचा, बोदरा और गट्टेगहन में समग्र शिक्षा मद से 1.2 किलोवॉट क्षमता के सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं। पहले बिजली को लेकर जो समस्याएं आती थीं, अब उनका समाधान हो गया है। सोलर ऊर्जा की वजह से स्कूलों में बिजली की व्यवस्था सुचारु रूप से चल रही है, जिससे बच्चों को होने वाली परेशानियां दूर हुई हैं। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था सशक्त और सुदृढ़ होगी, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई कहानी भी लिखी जा रही है।

वहीं, स्कूल के शिक्षक ब्रम्हा ठाकुर और रसोईया पुनीत कुमार ने बताया कि जब वे यहां आए थे, तब बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी। जिला प्रशासन के प्रयासों से अब स्कूल में लाइट और पंखे लगाए गए हैं, जिससे शिक्षकों और बच्चों दोनों को काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि अब बच्चे ज्यादा रुचि लेकर पढ़ाई कर रहे हैं और स्कूल का माहौल भी सकारात्मक हो गया है।

छात्रों ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में खुशी जाहिर करते हुए बताया कि पहले उनके स्कूल में बिजली की कोई सुविधा नहीं थी और उन्हें अंधेरे में पढ़ाई करनी पड़ती थी। अब सरकार की ओर से लाइट और पंखे की सुविधा मिलने से पढ़ाई में मन लगने लगा है और स्कूल आना अच्छा लगता है। बच्चों का कहना है कि अब वे पहले से ज्यादा ध्यान लगाकर पढ़ाई कर पा रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह भी बताती है कि कैसे स्थानीय सरकार और प्रशासन के प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास संभव है। यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे सौर ऊर्जा जैसी तकनीक ने शिक्षा के माहौल को बेहतर बनाया है।
NationPress
14/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या सौर ऊर्जा स्कूलों में पढ़ाई के लिए महत्वपूर्ण है?
जी हाँ, सौर ऊर्जा से स्कूलों में बिजली की व्यवस्था बेहतर हुई है, जिससे बच्चों को पढ़ाई में सुविधा मिलती है।
इन स्कूलों में सौर प्लांट कब लगाए गए?
इन स्कूलों में 1.2 किलोवॉट क्षमता के सोलर पावर प्लांट हाल ही में लगाए गए हैं।
क्या इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा?
बिल्कुल, इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और बच्चों को बेहतर माहौल मिलेगा।
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