क्या मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने अर्पित राठौर को गिरफ्तार किया? 14 लाख नकद जब्त
सारांश
Key Takeaways
- अर्पित राठौर की गिरफ्तारी मनी लॉन्ड्रिंग के बड़े नेटवर्क का संकेत हो सकती है।
- ईडी ने 14 लाख रुपए की नकद राशि जब्त की।
- इस मामले में कई अन्य आरोपियों की भी जांच की जा रही है।
- साइबर अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है।
- कानून प्रवर्तन एजेंसियों का सहयोग आवश्यक है।
जालंधर, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी), जालंधर जोनल ऑफिस ने 31 दिसंबर 2025 को अर्पित राठौर के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया और मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में उन्हें गिरफ्तार किया।
यह मामला एस. पी. ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट से संबंधित है और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत आता है। तलाशी के दौरान आपत्तिजनक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और 14 लाख रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की गई।
ईडी ने बीएनएसएस, 2023 के तहत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, लुधियाना द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। इसी समूह से जुड़े साइबर अपराध या डिजिटल अरेस्ट से संबंधित नौ अतिरिक्त एफआईआर को भी जांच में शामिल किया गया।
जांच में यह बात सामने आई कि एस. पी. ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट के समय, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन के अधिकारी बनकर धोखेबाजों ने उनसे 7 करोड़ रुपए वसूले। इसी समूह ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर धोखाधड़ी के जरिए 1.73 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
जांच में यह भी सामने आया कि फंड रूमी कलिता और अर्पित राठौर द्वारा संचालित कई म्यूल खातों के माध्यम से भेजे गए थे। गुवाहाटीरूमी कलिता और कानपुर के अर्पित राठौर इस गतिविधियों में शामिल हैं। यह भी पता चला कि रूमी कलिता ने अतानु चौधरी के साथ उनकी कंपनी मेसर्स फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स और दूसरी कंपनी रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों का उपयोग अवैध कमाई को वैध करने के लिए किया।
नौ डिजिटल अरेस्ट मामलों से मिली फंड फ्रोजनमैन वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स के खातों में जमा की गई, जबकि दो मामलों से मिली रकम रिग्लो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के खाते में डाली गई। ये रकम बाद में 200 से ज्यादा म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर की गईं, जिससे कमाई को दूसरी जगह भेजा जा सके। इन लेन-देन को अर्पित राठौर ने पूरा करवाया, जिसने पीड़ितों द्वारा जमा करने के बाद रूमी कलिता को फंड ट्रांसफर करने का निर्देश दिया।
जांच में यह भी पाया गया कि आरोपी अर्पित राठौर ने न केवल एस.पी. ओसवाल के डिजिटल अरेस्ट में, बल्कि कई अन्य साइबर अपराधों और मासूम लोगों को निशाना बनाने वाली धोखाधड़ी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अर्पित राठौर इन अपराधों को अंजाम देने के लिए विदेशी सहयोगियों के संपर्क में था, विदेशी नागरिकों को म्यूल खाते प्रदान करके और अवैध कमाई को विदेशी अधिकार क्षेत्र में ट्रांसफर करने में सहायता करता था। बदले में, इन विदेशी नागरिकों ने अर्पित राठौर को पैसे दिए और साइबर अपराध से होने वाले मुनाफे को विदेश भेजने में मदद करने के लिए म्यूल अकाउंट्स की डिटेल्स हासिल की।
इसके अलावा, यह भी पता चला कि अर्पित राठौर को आपराधिक कमाई का अपना हिस्सा यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी और भारतीय रुपए के रूप में मिला था।
इससे पहले, इस मामले में 22 दिसंबर को तलाशी ली गई थी और आरोपी रूमी कलिता को 23 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल ईडी की हिरासत में है। गिरफ्तारी के बाद, आरोपी अर्पित राठौर को एसीजेएम, कानपुर के सामने पेश किया गया, जिन्होंने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी और उसके बाद उसे जालंधर में विशेष न्यायालय के सामने पेश किया गया, जिसने आरोपी को 5 जनवरी तक पांच दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया।