मुंबई 3.0 परियोजना: भारत का पहला सहभागी भूमि अधिग्रहण मॉडल प्रस्तुत
सारांश
Key Takeaways
- सहभागी भूमि अधिग्रहण मॉडल से भूमि मालिकों को विकास में भागीदारी मिलती है।
- नई नीति से पारदर्शिता और सहमति में वृद्धि होती है।
- भूमि पूलिंग का विकल्प, विकास के हिस्से का पुनर्प्राप्ति प्रदान करता है।
- परियोजना का उद्देश्य सुनियोजित और संतुलित विकास को बढ़ावा देना है।
- ऑनलाइन सहमति प्रक्रिया 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगी।
मुंबई, १८ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने मुंबई 3.0 परियोजना के लिए भारत का पहला सहभागी भूमि अधिग्रहण मॉडल पेश किया है। इस नई योजना का मुख्य उद्देश्य भूमि अधिग्रहण की पारंपरिक विधि को परिवर्तित कर उसे अधिक पारदर्शी, सहमति आधारित और लोगों की भागीदारी से युक्त बनाना है। इस मॉडल में भूमि मालिकों को केवल मुआवजा देने के बजाय उन्हें विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया गया है।
यह पहल अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी–न्हावा शेवा अटल सेतु के प्रभाव क्षेत्र में बनाए जा रहे नए नगर विकास क्षेत्र के तहत शुरू की गई है। इसमें रायगढ़ जिले के उरण, पनवेल और पेन तालुकों के कुल १२४ गांवों में लगभग ३२३.४४ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र शामिल है। इस पूरे क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी अब मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण को दी गई है, जिसे नए नगर विकास प्राधिकरण के रूप में नियुक्त किया गया है।
यह महत्वपूर्ण कदम १६ मार्च २०२६ के सरकारी निर्णय के बाद उठाया गया है, जिसमें एक नई भूमि अधिग्रहण और भूमि पूलिंग नीति की रूपरेखा तैयार की गई थी। इस नीति के माध्यम से सरकार ने भूमि अधिग्रहण की पुरानी प्रक्रिया से हटकर एक ऐसा मॉडल अपनाया है जिसमें भूमि मालिकों को कई विकल्प दिए जा रहे हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार भूमि मालिक अपनी सहमति से मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं, जिसमें समझौते के आधार पर राशि तय की जाएगी। इसके अतिरिक्त, उन्हें विकास अधिकारों के रूप में भी मुआवजा दिया जा सकता है, जिसमें एफएसआई और टीडीआर जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। जहां लागू होगा, वहां अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान किया जाएगा।
इस मॉडल में भूमि पूलिंग का विकल्प भी शामिल किया गया है, जिसके तहत भूमि मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूमि का हिस्सा वापस दिया जाएगा। इस योजना के अनुसार उरण और पनवेल तालुकों के भूमि मालिकों को उनके क्षेत्र में विकसित भूमि का लगभग २२.५ प्रतिशत हिस्सा वापस मिलेगा, जबकि पेन तालुका के भूमि मालिकों को भी इसी तरह अपने क्षेत्र में विकसित भूमि का हिस्सा दिया जाएगा। इससे भूमि मालिक केवल मुआवजा प्राप्तकर्ता नहीं रहेंगे बल्कि वे इस पूरे शहरी विकास के हिस्सेदार बनेंगे।
मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर संजय मुखर्जी ने कहा कि मुंबई 3.0 का विकास पूरी तरह से जन-केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है। उनका कहना है कि शहर और राष्ट्र का निर्माण तभी सफल हो सकता है जब इसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने बताया कि इस मॉडल का उद्देश्य भूमि मालिकों को ऐसे विकल्प देना है जिससे वे अपनी जरूरत और हित के अनुसार निर्णय ले सकें।
इस परियोजना के तहत ऑनलाइन सहमति प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी, जो २७ अप्रैल २०२६ से उपलब्ध होगी। इसके लिए भूमि मालिकों को आधार कार्ड और भूमि से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।
इस पहल का उद्देश्य मुंबई महानगर क्षेत्र में सुनियोजित और संतुलित शहरी विकास को बढ़ावा देना है। इससे न केवल बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होगा बल्कि नए शहरों के विकास में भी मदद मिलेगी। यह मॉडल भारत में शहरी विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जहां भूमि मालिक विकास के प्रत्यक्ष भागीदार बनेंगे और पूरे क्षेत्र के विकास से लाभान्वित होंगे।