नर्मदेश्वर महादेव मंदिर: तंत्र के देवता के रूप में भगवान शिव की अद्भुत पूजा
सारांश
Key Takeaways
- नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की पूजा मेंढ़क की पीठ पर होती है।
- यह मंदिर 'मंडूक तंत्र' का प्रतिनिधित्व करता है।
- मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के राजा बख्श सिंह ने किया।
- शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है।
- मंदिर के चारों ओर प्राचीन स्तंभ हैं, जो शैव तंत्र का प्रमाण हैं।
नई दिल्ली, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत के हर शिव मंदिर में शिवलिंग के समक्ष नंदी महाराज की प्रतिमा होती है, जो उनकी आराधना में महत्वपूर्ण मानी जाती है। लेकिन, क्या आपने उत्तर प्रदेश के उस अद्भुत मंदिर का दर्शन किया है, जहां भगवान शिव की सवारी नंदी नहीं, बल्कि मेंढ़क है? यह अद्वितीय दृश्य नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में देखने को मिलता है, जिसे इच्छापूर्ति महादेव के नाम से भी जाना जाता है।
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से लगभग 11-13 किमी दूर ओयल कस्बे में स्थित नर्मदेश्वर महादेव मंदिर, जिसे मेंढ़क मंदिर भी कहा जाता है, अपनी विशेष वास्तुकला और ऐतिहासिकता के लिए प्रसिद्ध है। इसकी भवन संरचना इस प्रकार है कि ऐसा लगता है मानो एक मेंढ़क ने अपना भार उठाया हुआ है, और मध्य में महादेव का शिवलिंग स्थापित है। मेंढ़क की पीठ पर आठ कमल के पंखुड़ियों जैसा डिज़ाइन भी देखने को मिलता है। मंदिर के चारों ओर प्राचीन स्तंभ हैं, जो शैव तंत्र का प्रमाण हैं।
कहा जाता है कि नर्मदेश्वर महादेव मंदिर का संबंध तंत्र से है, यही कारण है कि भगवान शिव मेंढ़क की पीठ पर विराजमान हैं। इसे आम भाषा में 'मंडूक तंत्र' के नाम से भी जाना जाता है। यह तंत्र धन और समृद्धि को आकर्षित करने, साधना में सहायक और नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है, और यह देश का पहला मंदिर है जो इस तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है।
मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के राजा बख्श सिंह ने किया था, जिसे शैव संप्रदाय का प्रमुख तंत्र केंद्र माना जाता है। इसका निर्माण तंत्र के साथ-साथ राज्य को बाढ़ और सूखे से बचाने के उद्देश्य से किया गया था। मंदिर की भीतरी वास्तुकला भी अद्भुत है, जहां मौजूद भूलभुलैया आज भी एक रहस्य बनी हुई है। किसी को नहीं पता कि इसका मार्ग कहां जाता है।
मंदिर की स्थापना की कई किंवदंतियां हैं। ऐसा माना जाता है कि राजा बख्श सिंह ने एक तांत्रिक की सलाह पर मंडूक तंत्र का उपयोग किया था, जिससे राज्य में भारी बारिश हुई। तभी से यह मंदिर तंत्र सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है। गर्भगृह में मौजूद शिवलिंग और नंदी महाराज की प्रतिमा भी चमत्कारी मानी जाती है। स्थानीय जन विश्वास करते हैं कि शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है और नंदी महाराज की प्रतिमा अपने चारों पैरों पर खड़ी है। यह दृश्य भक्तों को चमत्कारिक लगता है।