क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे से कांग्रेस को मुसलमानों की अनदेखी का खतरा है?
सारांश
Key Takeaways
- नसीमुद्दीन सिद्दीकी का इस्तीफा कांग्रेस के लिए एक नया संकट है।
- कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी पर चिंता व्यक्त की।
- भाजपा द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोपों का कांग्रेस को सामना करना पड़ रहा है।
नई दिल्ली, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। यूपी के २०२७ विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी प्रदेश में अपने संगठन को सशक्त बनाने के लिए प्रयासरत है। इसी बीच, शनिवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ, जब नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस से अपने इस्तीफे की घोषणा की। उनके इस्तीफे के बाद प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों में तेजी आ गई है। भाजपा के साथ कांग्रेस के नेताओं के वक्तव्यों ने स्थिति को और गरमा दिया।
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने नसीमुद्दीन के इस्तीफे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राहुल गांधी
नई दिल्ली में राशिद अल्वी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि नसीमुद्दीन के इस्तीफे का मामला गंभीर है। भाजपा कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण का आरोप लगाती है, और इसका परिणाम यह है कि कांग्रेस पार्टी लगातार मुस्लिम नेतृत्व को अनदेखा कर रही है। बिहार में शकील ने पार्टी छोड़ी, यूपी में नसीमुद्दीन ने और कर्नाटका में रोशन बेग ने इस्तीफा दिया। कांग्रेस को इस बात की चिंता करनी चाहिए कि भारत का मुसलमान कांग्रेस को वोट देता है, बावजूद इसके पार्टी मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज कर रही है।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए राशिद अल्वी ने कहा कि इसका उद्देश्य क्या था? क्या भारतीय सरकार ने सिर्फ कुछ इमारतें गिराने के लिए इसे लागू किया था? वर्तमान में, भारत में आतंक फैलाने वाले कई आतंकवादी पाकिस्तान में जीवित हैं। हाफिज सईद, सलाहुद्दीन, और दाऊद इब्राहिम आज भी सक्रिय हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना इस्तीफा भेजा था। उन्होंने पार्टी छोड़ने के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए। अपने पत्र में सिद्दीकी ने कहा कि वे अपरिहार्य कारणों से अपनी प्राथमिक सदस्यता और सभी संगठनात्मक जिम्मेदारियों को त्याग रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ उनकी कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन उन उद्देश्यों के लिए जो उन्होंने पार्टी में शामिल होने के लिए चुने थे, वे पूरे नहीं हो रहे थे।