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क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध था? नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट के फैसले पर केसी वेणुगोपाल

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क्या यह राजनीतिक प्रतिशोध था? नेशनल हेराल्ड केस में कोर्ट के फैसले पर केसी वेणुगोपाल

सारांश

नेशनल हेराल्ड केस में हालिया अदालत के फैसले ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भाजपा और ईडी पर कड़ी टिप्पणी की है, यह कहते हुए कि कोर्ट का निर्णय राजनीतिक प्रतिशोध का एक उदाहरण है। क्या यह सच में एक साजिश थी?

मुख्य बातें

नेशनल हेराल्ड केस में अदालत का फैसला राजनीतिक प्रतिशोध का उदाहरण है।
कांग्रेस ने भाजपा और ईडी पर साजिश का आरोप लगाया है।
सत्य की जीत की उम्मीद और लोकतंत्र की रक्षा की आवश्यकता।

नई दिल्ली, 16 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। नेशनल हेराल्ड मुद्दे पर अदालत के हाल के निर्णय पर कांग्रेस ने भाजपा और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कोर्ट का यह निर्णय उन सभी प्रयासों पर एक जोरदार तमाचा है, जिनके माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व को फंसाने की कोशिश की जा रही थी।

केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "बार-बार, भाजपा के नियंत्रण वाली ईडी ने पूरी तरह से झूठे नेशनल हेराल्ड केस में कांग्रेस नेतृत्व को फंसाने का प्रयास किया है। कोर्ट का आज का फैसला, जिसमें कहा गया है कि यह मामला बिना अधिकार क्षेत्र, बिना एफआईआर और बिना किसी ठोस आधार के है, यह साबित करता है कि यह पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित था।"

उन्होंने कहा कि यह उन सभी लोगों के लिए एक करारा तमाचा है जो इस निरर्थक मामले के जरिए सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। आज का यह फैसला ईडी सहित प्रतिशोध की भावना से काम करने वाली जांच एजेंसियों को एक स्पष्ट संदेश देना चाहिए, जो गलत मामलों के जरिए अपने आकाओं को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

वेणुगोपाल ने आगे लिखा, "कांग्रेस और उसकी नेतृत्व मौजूदा सरकार के डेमोक्रेसी और संविधान पर हमलों का सामना करने में सबसे आगे है। हम सभी चुनौतियों के लिए तैयार हैं और हमें पता है कि अंततः सत्य की ही जीत होती है। सत्यमेव जयते।"

ज्ञात रहे कि नेशनल हेराल्ड केस इस समय राजनीतिक हलचल का केंद्र है। नेशनल हेराल्ड अखबार की स्थापना 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। इसका प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा किया जाता था। आर्थिक संकट के कारण 2008 में अखबार बंद हुआ, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ। 2010 में 'यंग इंडिया प्राइवेट लिमिटेड' नामक कंपनी बनाई गई, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में खुलासा हुआ कि यंग इंडिया ने 50 लाख रुपए में एजेएल की करीब 2,000 करोड़ रुपए की संपत्तियां हासिल कीं, जबकि उनकी बाजार कीमत कहीं अधिक थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह हमारे लोकतंत्र और संविधान पर भी गहरा प्रभाव डालता है। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित मामलों में न्याय का क्या महत्व है।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेशनल हेराल्ड केस क्या है?
नेशनल हेराल्ड केस एक विवाद है जिसमें कांग्रेस नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने एक संपत्ति को अवैध तरीके से अपने नाम किया।
इस मामले में अदालत का फैसला क्या आया?
अदालत ने इस मामले को बिना आधार, बिना अधिकार क्षेत्र और बिना एफआईआर के बताया, जो राजनीतिक प्रतिशोध का एक उदाहरण है।
क्या यह मामला राजनीतिक साजिश है?
कांग्रेस का मानना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश और बदले की भावना से प्रेरित है।
राष्ट्र प्रेस
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