क्या सभी लीडर्स निश्चित रूप से पाठक होते हैं?: नौसेना प्रमुख
सारांश
Key Takeaways
- पढ़ाई और लीडरशिप के बीच का संबंध महत्वपूर्ण है।
- पुस्तकें आपके ज्ञान को बढ़ाने में मदद करती हैं।
- एक अच्छी लीडरशिप के लिए पढ़ाई आवश्यक है।
- पढ़ाई से कठिन परिस्थितियों का सामना करना आसान होता है।
- नौसेना प्रमुख ने पढ़ाई की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
नई दिल्ली, 16 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने पढ़ाई और लीडरशिप के बीच की कड़ी को उजागर करते हुए कहा, “सभी पाठक लीडर हों, यह आवश्यक नहीं है, लेकिन सभी लीडर्स निश्चित रूप से पाठक होते हैं।”
नौसेना प्रमुख ने शुक्रवार को नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026 में भाग लिया। उन्होंने ‘किंडल पीढ़ी’ को पुस्तक स्टॉलों की ओर बढ़ते हुए देखकर प्रसन्नता व्यक्त की, जिसे पढ़ने के आनंद का प्रतीक माना। उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के प्रयासों की सराहना की।
इस पुस्तक मेले का सफल आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास ने किया है। एडमिरल ने कहा, “जब हम भारतीय सैन्य बलों की बात करते हैं, तो लीडरशिप के महत्वपूर्ण निर्णयों की चर्चा होती है, और पुस्तकों तथा नेतृत्व के बीच एक गहरा संबंध है। मेरे व्यक्तिगत अनुभव से, मैं कह सकता हूं कि पढ़ाई न केवल युद्ध के समय में बल्कि दैनिक जीवन में भी अत्यंत उपयोगी होती है। जो परिस्थितियां कठिन या चुनौतीपूर्ण लगती हैं, वे नियमित रूप से किताबें पढ़ने से आसान हो सकती हैं क्योंकि किताबें मार्गदर्शक का कार्य करती हैं और आपकी जिज्ञासाओं को शांत करती हैं।”
उन्होंने सभी को पढ़ाई की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि सोने से पहले केवल दो पन्ने पढ़ना भी किसी व्यक्ति को बेहतर बना सकता है। यह किसी भी परिस्थिति का बेहतर तरीके से सामना करने के लिए तैयार करता है। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के भ्रमण करने वाले विशिष्ट अतिथियों में गजेंद्र सिंह शेखावत, जनरल वीके सिंह और बनवारी लाल पुरोहित शामिल रहे।
राजधानी के सर्द मौसम के बावजूद, यहाँ पुस्तक प्रेमियों की गर्मजोशी बनी हुई है। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला के सातवें दिन न केवल अन्य दिनों से अधिक भीड़ नजर आई, बल्कि पुस्तकों की खरीदारी भी जोर-शोर से हुई। लोग जगह-जगह बने सेल्फी पॉइंट पर तस्वीरें लेकर इन उत्साहपूर्ण पलों को कैमरे में कैद कर रहे हैं।
थीम पवेलियन में त्रिपाठी की उपस्थिति में कमांडर कलेश मोहनन, लेफ्टिनेंट कमांडर अनुपमा थपलियाल और लेफ्टिनेंट जीवितेश सहारन द्वारा लिखित पुस्तक ‘फोर्ज्ड बाय द सी: द इंडियन नेवी स्टोरी’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक भारतीय नौसेना, नेवल हिस्ट्री डिवीजन, नेवल फाउंडेशन और नेशनल बुक ट्रस्ट के बीच महत्वपूर्ण बौद्धिक सहयोग का परिणाम है। बारह अध्यायों में विभाजित यह पुस्तक प्राचीन सभ्यताओं के उद्गम स्थलों और समृद्ध समुद्री व्यापार से लेकर आधुनिक, तकनीकी रूप से उन्नत भारतीय नौसेना तक, भारत की समुद्री विरासत का विस्तार से वर्णन करती है।
इसमें नौसेना की संरचना, सतही बेड़ा, पनडुब्बियां, नौसैनिक विमानन, रैंक संरचना, वर्दी और परंपराओं का व्यापक चित्रण है। इसके अलावा, गोवा मुक्ति, 1971 का भारत-पाक युद्ध, और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान नौसेना की भूमिका जैसी ऐतिहासिक घटनाओं का भी दस्तावेजीकरण किया गया है।